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भदोही: जातीय गुणा गणित में विकास के मुद्दे हुए गायब, 80 के दशक के बाद से जातीयता की राजनीति के फेर में उलझा रहा ये क्षेत्र


लखनऊ (ब्यूरो) धार्मिक नगरी वाराणसी-इलाहाबाद के बीच बसा भदोही संसदीय क्षेत्र कालीन निर्माण व निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, हजारों युवाओं के रोजगार का एकमात्र साधन, चार हजार करोड़ रुपए सालाना का कारोबार करने वाले इस संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए एक ऐसे रहनुमा की तलाश है जो यहां की स्वास्थ्य, शिक्षा के साथ बुनियादी व्यवस्था में सुधार कर सके, मगर 80 के दशक के बाद से जातीयता की राजनीति के फेर मे यह क्षेत्र ऐसा उलझा कि यहां की रहनुमाई करने वाले तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ते गए और अपने हुनर एवं उंगलियों के दम पर पूरी दुनिया में कालीन के अद्भुत नमूना तैयार करने वाले जहां के तहां है, मगर इन सबके बीच कहीं जातिवाद तो कहीं राष्ट्रवाद और उद्योग की बेहतरी के मुद्दे हावी है, रविवार को हुए मतदान में मतदाताओं ने सभी प्रत्याशियों की किस्मत को ईवीएम में कैद कर दिया है मगर यहां के मतदाताओं का मिजाज इस बार त्रिकोणीय संघर्ष की ओर संकेत दे रहा है।
भदोही पहले बनारस का हिस्सा हुआ करता था 70 के दशक में कालीन बनाने की विधा ने इस शहर को पूरी दुनिया में अलग पहचान दिलाई, कोई ऐसा गांव या मोहल्ला नहीं जहां पर कालीन का काम ना होता हो कालीन यहां की जमीनी पहचान में समाया हुआ है, वर्तमान में यहां के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त है मगर भाजपा ने उन्हें 2019 के आमचुनाव मे बलिया से टिकट दिया है, 2014 में उन्होंने बसपा के कद्दावर नेता राकेशधर त्रिपाठी को हराया था, इस बार भाजपा ने जातीय समीकरण को देखते हुए मझवा (मिर्जापुर) से तीन बार लगातार विधायक रहे रमेशचंद्र बिंद को मैदान में उतारा है, डेढ़ माह पूर्व उन्होंने बसपा को छोड़ भाजपा की सदस्यता ली थी, कांग्रेस ने यहां से बाहुबली व आजमगढ़ से चार बार सांसद व इतनी ही बार विधायक रहें रमाकांत यादव पर दाव खेला हैं, सपा-बसपा गठबंधन के तहत उक्त सीट बसपा के खाते मे गई हैं।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने यहां से पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र को मौका दिया है, ब्राह्मण, बिंद, यादव, मुस्लिम दलित बहुल वोटरों वालें इस लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार नजर आ रहे हैं, भाजपा ने रमेशचंद्र बिंद को मैदान में उतारकर पिछड़ी जातियों को साधने की भरपूर कोशिश की है, जबकि गठबंधन ब्राह्मण प्रत्याशी के साथ यादव, मुस्लिम व दलित गठजोड़ से चुनावी नैया पार करने की जुगत में है, कांग्रेस ने आजमगढ़ से भाजपा के पूर्व सांसद रहें रमाकांत को टिकट देकर दोनों दलों की मुश्किलें बढ़ाई हैं, ऐसे मे तीनो प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर के आसार दिखाई दे रहें हैं, यहां के मतदाताओं ने 12 मई दिन रविवार को सभी प्रत्याशियों की किस्मत को ईवीएम में कैद कर दिया है अब 23 मई को यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि मतदाताओं ने किस प्रत्याशी को जीत का सेहरा बांधा है।

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

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