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गोरखपुर: क्या निषाद वोटरों की नाराजगी भोजपुरिया स्टार पर पड़ेगीं भारी, आसान नही बीजेपी उम्मीदवार रविकिशन की डगर



गोरखपुर (ब्यूरो) भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार और साउथ इंडियन फिल्मों के नामी खलनायक रवि किशन इस बार फिल्मों मे नही बल्कि उत्तर प्रदेश की सबसे वीवीआईपी हॉट सीट पर भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी की भूमिका में हैं, लखनऊ नंबर की इंडेवर चारपहिया की खुली छत पर भगवा कुर्ते में उनका जनसंपर्क कार्यक्रम सुबह 9 बजे से ही शुरू हो जाता है, लेकिन पिछली बार बीजेपी की इस सीट से हुई हार से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है, उन कार्यकर्ताओं मे जान फूंकने के लिए रवि किशन और उनकी पत्नी प्रीति अपने तरफ से भरपूर प्रयास कर रही हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है कि रवि किशन बातचीत में काफी सहज हैं और आमलोगों के साथ सेल्फी लेने के लिए सुलभ हैं, रवि किशन ने बाहरी होने के ठप्पा से बचने के लिए इस भोजपुरी सुपरस्टार ने मोहद्दीपुर में एक बहुमंजिला अपार्टमेंट में चार कमरे का एक फ्लैट करीब सवा करोड़ रुपये में खरीदा है, उनकी पत्नी प्रीति भी मुंबई की अपनी घर गृहस्थी छोड़कर लोकसभा क्षेत्र गोरखपुर पहुंच चुकी हैं, विदित हो कि रविकिशन पिछली बार उत्तर प्रदेश के जौनपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लिहाजा इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने को उनके समर्थक राजनीतिक व्यवहारिकता कहते हैं, लेकिन विपक्षी दल इस चुनाव मे इसे खूब मुद्दा बना रहे हैं।
2014 में कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ चुके रवि किशन को इस बार भारतीय जनता पार्टी ने गोरखपुर सीट से क्यों उतारा हैं, "खबरें आजतक Live" के संपादक विनोद कुमार गुप्ता के द्वारा पुछे गए इस सवाल के जवाब में रवि किशन कहते हैं कि पिछली बार बीजेपी ने उन्हें टिकट ऑफर किया था, लेकिन तब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उस चुनाव को हारने के बाद पार्टी या किसी भी नेता का एक बार भी एक भी फोन नहीं आया, इस व्यवहार से दुखी होकर मैं भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गया।

आखिर रविकिशन को गोरखपुर से टिकट कैसे मिला, उन्हीं की जुबानी-
उत्तर प्रदेश में गोरखपुर की सीट सबसे प्रतिष्ठित सीट मानी जाती है, ऐसे में रवि किशन को सपने में भी अहसास नहीं था कि ये सीट उनको खुद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देंगे, आगे रवि किशन बताते हैं कि मुझे जौनपुर,भदोही या सिद्धार्थनगर से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन एक दिन फिल्म की शूटिंग के दौरान दोपहर दो बजे एक फोन आया, योगी महाराज जी ने कहा कि गोरखपुर से चुनाव लड़ना है, फिर दुबारा अमित शाह जी का आदेश हुआ, मै रहने वाला जरूर जौनपुर का हूं, लेकिन गोरखपुर में मामखोर एक जगह है वहीं से मेरा परिवार पुराना ताल्लुक रखता है।

गोरखपुर के सियासी और जातीय समीकरण में उलझे रवि किशन-
गोरखपुर में सबसे ज्यादा निषाद के 3.50 लाख वोटर हैं, फिर करीब डेढ़ लाख मुसलमान, 2 लाख यादव, 2 लाख दलित, करीब तीन लाख ब्राहम्ण, 80 हजार राजपूत और भी छोटी बड़ी कई जातियां है, ज्ञात हो कि लोकसभा उपचुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी के उपेंद्र शुक्ला करीब 20, 000 वोटों से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण निषाद से पराजित गए थे, रवि किशन का काफिला निकलते ही लेबर चौक पर छोटी जनरल स्टोर की दुकान चला रहे महेश निषाद हथेली से सुर्ती ठोंकते हुए कहते हैं कि बाबू रवि किशनवा के डगरिया बहुते मुश्किल बा, अगर प्रवीण निषाद के टिकट मिलत ना तो वो जीत लिहिस रहा।
महेश निषाद जैसे वोटर का राम भुआल निषाद के प्रति बहुत हमदर्दी है और गोरखपुर लोकसभा जीत चुके उम्मीदवार प्रवीण निषाद को गोरखपुर से न लड़ाने पर बीजेपी के खिलाफ नाराजगी भी है, यहां से आगे बढ़ने पर राजेंद्र नगर के रहने वाले मंयक मिश्रा कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ ने यहां पर पैराशूट उम्मीदवार इसलिए भी उतारा है, ताकि उनका सियासी भविष्य पक्का और सुरक्षित रहे, गोरखपुर के लोकल लीडरों में अंदरखाने इस बात को लेकर काफी नाराजगी है, इसलिए गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी की राह आसान नहीं दिख रही है, जब ये सवाल रवि किशन से पूछा गया तो उन्होंने अति आत्मविश्वास से लबरेज़ होकर कहा कि आपको अंदाजा है हम हर घर पहुंचेंगे और लोगों को समझाएंगे, हमारे पास सभी जातियों का समर्थन है, खैर चुनावी हार और जीत 23 मई को ही पता चलेगा, लेकिन यहां पर मुकाबला कांटे का है, बताते चले कि गोरखपुर में अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होना हैं, गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रवि किशन का मुकाबला कांग्रेस के मधुसूदन तिवारी और समाजवादी पार्टी के राम भूवल निषाद से होगा।

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

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