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यूपी: योगी सरकार के इस फरमान से कई ग्राम प्रधान इस बार नहीं लड़ पायेंगे पंचायत चुनाव, इस जांच की आंच में फस सकते हैं कई ग्राम प्रधान

"काफ़ी परेशान और सांसत में हैं ग्राम प्रधान, पांच साल के कार्यकाल में ग्राम प्रधानों ने सरकारी पैसे को कहां-कहां और कितना किया इस्तेमाल, इसकी शुरू होनेे वाली हैं जांच"

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लखनऊ (ब्यूरो, उत्तर प्रदेश)। यूपी में अभी पंचायत चुनाव की तैयारियां अपने चरम पर चल रही हैं। 25 दिसंबर की रात से प्रदेश में 58 हजार से भी ज्यादा ग्राम पंचायतों की पांच साल की अवधी समाप्त हो चुकी हैं और उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है। ऐसे में अब चुनाव की तारीखों का इंतजार है, हालांकि वोटर लिस्ट दुरुस्त, आरक्षण सूची और परिसीमन का काम अपने अंतिम चरण में चल रहा है। ऐसे में संभावना है कि जनवरी के आखरी सप्ताह या फरवरी के पहले सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाए और प्रदेश में चुनावी बिगुल बज जाए। इस बीच सरकार केे एक आदेश सेे 25 दिसंंबर को अपना कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम प्रधान काफ़ी परेशान नजर आ रहे हैं और सांसत में हैं। परेशानी का सबब है उनकें पांच साल का कार्यकाल में ग्राम प्रधानों ने अपने कार्यकाल में सरकारी पैसे को कहां-कहां और कितना इस्तेमाल किया है इसकी जांच शुरू होनेे वाली है। अगर इस जांच की आंच आती है और गड़बड़ी पाई गई तो कई मौजूदा ग्राम प्रधानों के इस बार चुनाव लड़ने पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। जांच करनें के लिए जिला पंचायत अधिकारी जांच अधिकारी होंगे। जिला पंचायत अधिकारी जांच करेंगे कि प्रधानों ने अपने कार्यकाल में राजस्व को कहां-कहां और कितना इस्तेमाल किया।

कार्यकाल के दौरान कितनी धनराशि आवंटित की गई है और कितना धनराशि से विकास कार्य कराया गया है। इसकी भी जांच होगी। मुख्यालय से आदेश आया है कि जमीनी जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद यदि किसी प्रकार की गड़बडी पाई जाती है तो संबंधित तत्कालीन ग्राम प्रधान के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई भी करना सुनिश्चित की जाए। प्रदेश में 58 हजार से ज्यादा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त होने के बाद से अब पंचायत चुनाव तक ग्राम सभा का कार्यभार एडीओ संभालेंगे। इस बार ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे। प्रदेश में शनिवार से ग्राम पंचायत की कमान एडिशनल डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर (एडीओ) संभालेंगे। अब यही अधिकारी ग्राम पंचायत के विकास के लिए काम करेंगे। इसके साथ ही लोगों की समस्याओं का त्वरित निवारण भी करेंगे। प्रदेश का पंचायती राज विभाग 28 जनवरी से 5 फरवरी के बीच चुनाव से संबंधित संभावित कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार कर रहा है। इसके बाद चुनाव आयोग अपने हिसाब से पंचायत चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करेगा। राज्य सरकार ये चाहती है कि 31 मार्च तक चुनाव कराते हुए पंचायतों का गठन किया जा सके, जिससे अप्रैल में होने वाली बोर्ड की परीक्षाओं पर किसी तरह का कोई असर न पड़े।

रिपोर्ट- लखनऊ डेस्क

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