बलिया (ब्यूरो) स्वतंत्रता संग्राम के महानायक ,स्वतंत्र बलिया प्रजातंत्र के प्रथम शासनाध्यक्ष, शेर-ए-बलिया चित्तू पाण्डेय की 124 वीं जयंती शेरे बलिया चित्तू पाण्डेय स्मारक समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को मनायी गयी ।इस दौरान चित्तू पाण्डेय की प्रतिमा पर विशिष्टजनों द्वारा माल्यार्पण किया गया तथा अमर रहे का उद्घोष भी किया गया ।इसके पश्चात एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सभी ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला ।बताते चले कि चित्तू पाण्डेय के साहस व नेतृत्व क्षमता का लोहा अंग्रेजी शासन भी मानता था ।हमे उनसे सीख लेते हुए अपने देश की एकता व अखंडता के लिए कार्य करना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम में जहां ब्रितानी शासन का सूर्य अस्त नही होता था वही पाण्डेय जी ने स्वतंत्रता का विगुल फूंका । हम सब सौभाग्यशाली है कि शेरे बलिया की धरती पर पैदा हुए है ।उनके पदचिन्हों पर चल कर ही हम सशक्त, विकासशील भारत का निर्माण कर सकते है ।
चित्तू पाण्डेय का जन्म बलिया जिले के रत्तूचक गांव में 10मई 1865 को हुआ था जिन्होंने 1942 में स्थानीय लोगों की फौज बनाकर अंग्रेजों को खदेड़ दिया तथा 19 अगस्त 1942 को वहाँ स्थानीय सरकार बनी तथा चित्तू पाण्डेय स्वतंत्र बलिया के प्रथम कलेक्टर बने और कुछ दिनों तक बलिया में उनका शासन भी चला ।उनके इस कृतित्व से लंदन तक हिल गया था ।चित्तू पाण्डेय की मृत्यु 6 दिसम्बर 1946 को हुई थी ।प्रत्येक वर्ष बलियावासी शेर-ए-बलिया की जयंती पर चित्तू पाण्डेय चौराहे पर स्थित इनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करके सभा का आयोजन करते है ।इसके पश्चात सरस्वती बालिका विद्या मंदिर ,रामपुर उदयभान पर बच्चों को मिष्ठान वितरित किया गया ।
इस अवसर पर विधायक चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय चित्रकूट , चित्तू पाण्डेय के सुपौत्र जैनेन्द्र पाण्डेय , डॉ रामकृष्ण उपाध्याय, डॉ चंद्रशेखर उपाध्याय, शशिकांत चतुर्वेदी, रामकिंकर सिंह, डॉ अशोक पाण्डेय,करुणानिधि तिवारी,ओमकार जी,रितिक,शांतिभूषण राम,मयंक पाण्डेय, सुनील सिंह, संतोष दीक्षित, अभिषेक पाण्डेय आदि मौजूद रहे ।
रिपोर्ट- संवाददाता डॉ अभिषेक पाण्डेय


