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यूपी: अमेठी से भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने आम जनता से की ये भावुक अपील, जानिए अमेठी का पूरा इतिहास


अमेठी (ब्यूरो) भाजपा की नेत्री और उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने क्षेत्र की जनता से एक अपील की है जो सहज ही लोगों का ध्यान खींचती है, हमारी भारतीय संस्कृति में एक पूरा का पूरा शब्द शास्त्र है, संस्कृत भाषा में रचे गए मंत्र इसीलिए अमोघशक्ति वाले माने जाते हैं, गायत्री मंत्र का महत्व यूं ही नहीं है, बल्कि विज्ञान ने भी स्वीकार किया है कि गायत्री मंत्र के विशुद्ध उच्चारण से जो ध्वनि निकलती है उसका शारीरिक और मानसिक प्रक्रिया पर बहुत प्रभाव पड़ता है, अच्छे शब्द हमें प्रभावित करते हैं जबकि कटु शब्द उत्तेजित कर देते हैं, राजनेता भाषण का ही राशन खाते हैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के बारे में कहा जाता है कि लखनऊ से दो बार चुनाव हारने के बाद जब तीसरी बार चुनाव लड़ रहे थे तो उन्होंने एक ऐसी बात कह दी जिसके बाद लखनऊ के मतदाताओं ने उन्हें ऐसा अपनाया की जीवन पर्यंत तक नहीं छोड़ा, अटल जी ने एक जनसभा में कहा 'आप लखनऊ लोकसभा क्षेत्र के मतदाता यदि समझते हैं कि मैं आपका पीछा छोड़ दूंगा, आप पराजित करिए कितना भी पराजित करेंगे लेकिन मैं पीछे छोड़ने वाला नहीं हूं'।
कुछ ऐसी ही बात इस बार स्मृति ईरानी ने कही है, स्मृति ईरानी गुजरात से राज्यसभा सदस्य हैं और भाजपा ने एक बार फिर अमेठी से उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मुकाबले में चुनाव मैदान में उतारा है, स्मृति ईरानी ने 11 अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल किया इससे एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने रोड शो कर के नामांकन पत्र दाखिल किया था, राहुल गांधी इस बार दो स्थानों से चुनाव लड़ रहे हैं अमेठी के साथ केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ने पर स्मृति ने राहुल गांधी पर बहुत ही प्यारा तंज कसा, स्मृति ने अमेठी के मतदाताओं से कहा कि राहुल गांधी को आपने जिताया था, फिर भी वह आपको छोड़ कर चले गए लेकिन मैं हारने के बाद भी आपको छोड़कर जाने वाली नहीं हूं, मैं फिर अमेठी से ही चुनाव लड़ रही हूं स्मृति ईरानी का अमेठी के प्रति लगाव इससे पता चलता है, और साथ ही मौके की नजाकत का फायदा कैसे उठाया जा सकता है इसका भी संकेत स्मृति ईरानी ने दिया है, राहुल गांधी पहली बार दो संसदीय क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन यह कोई नई बात नहीं है विगत लोकसभा चुनाव 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और समाजवादी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव भी दो दो सीटों से चुनाव लड़े थे और दोनों सीटों पर विजयी भी रहे, इसीलिए राहुल गांधी का दो सीटों पर चुनाव लड़ना भी कोई आश्चर्य नहीं है, लेकिन उनकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी स्मृति ईरानी ने इसे भावनात्मक मुद्दा अमेठी के लिए बना दिया है, कमेटी के साथ ही वायनाड से चुनाव लड़ने के कारण राहुल गांधी अपने विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं, स्मृति ईरानी ने कहा है कि राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने से यह साफ हो गया है कि उनके लिए अमेठी नहीं बल्कि वायनाड महत्वपूर्ण है, लेकिन मेरे लिए पिछले पांच साल में सिर्फ अमेठी ही महत्वपूर्ण है, अमेठी का चुनाव अब भावनात्मक रिश्तो पर टिक गया है, आजादी के बाद पहली बार जब लोकसभा के चुनाव हुए थे तब अमेठी संसदीय सीट का अस्तित्व ही नहीं था उस समय इस लोकसभा सीट का ज्यादा क्षेत्र सुल्तानपुर दक्षिण लोकसभा सीट में आता था।
लोकसभा के पहले चुनाव में कांग्रेस को ही ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल हुई थी और सुल्तानपुर दक्षिण लोकसभा सीट से कांग्रेस के बालकृष्ण विश्वनाथ केशकर चुनाव जीते थे, इसके बाद दूसरे लोकसभा चुनाव 1957 में मुसाफिरखाना सीट अस्तित्व में आई जो वर्तमान में अमेठी जिले की एक तहसील है, अमेठी लोकसभा सीट 1967 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और पहली बार इस लोकसभा सीट से विद्याधर बाजपेई सांसद बने थे।
विद्याधर बाजपाई को क्षेत्र की जनता ने अपना बेहतर प्रतिनिधि मानते हुए 1971 के चुनाव में भी विजयी बनाया था, कांग्रेस ने 1977 के चुनाव में अपनी रणनीति बदल दी और यहां से संजय सिंह को अपना प्रत्याशी बना दिया, यह समय था कांग्रेस सरकार की आपातकाल वाली ज्यादतियों के विरोध में मतदान का और संजय सिंह को पराजय का सामना करना पड़ा, अमेठी की सीट नेहरू गांधी परिवार की सीट बन चुकी थी और 1980 मैं जब मोरारजी सरकार के बाद चरण सिंह की सरकार गिरी तो कांग्रेस को फिर से अपार जन समर्थन मिला, और 1980 के चुनाव में यहां से श्रीमती इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी मैदान में उतरे संजय गांधी को अमेठी की जनता ने सांसद बनाया, लेकिन दुर्भाग्य से 1980 में ही संजय गांधी का एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया एक साल बाद अर्थात 1981 में अमेठी संसदीय सीट पर उपचुनाव कराया गया और श्रीमती इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी अपनी मां के कहने पर अमेठी से चुनाव लड़े, अमेठी की जनता ने राजीव गांधी को अपना संसदीय प्रतिनिधि बनाया, अमेठी के सामने एक बार कठिन परीक्षा का समय आया था श्रीमती इंदिरा गांधी की 1984 में उनके ही रक्षकों ने हत्या कर दी राजीव गांधी ने उस समय भी अपनी माता श्रीमती इंदिरा गांधी की लोकसभा सीट रायबरेली को प्रमुखता नहीं दी और अमेठी से ही लोकसभा चुनाव लड़े थे, उस चुनाव में उनके सामने उनके छोटे भाई संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी चुनाव लड़ रही थी, मेनका गांधी ने उस समर भाजपा ज्वाइन नहीं की थी और निर्दलीय चुनाव लड़ा था, उनके पति स्वर्गीय संजय सिंह गांधी ने अमेठी का प्रतिनिधित्व नहीं किया था लेकिन नेहरू गांधी परिवार के ही थे।
इसके बावजूद अमेठी की जनता ने मेनका गांधी को स्वीकार नहीं किया और राजीव गांधी को तीन लाख वोटों से विजयी बनाया था, मेनका गांधी को सिर्फ पचास हजार वोट ही मिल पाया था, राजीव गांधी ने अमेठी को अपना कर्मक्षेत्र बनाया उन्होंने 1981 और 1991 के चुनाव भी जीते लेकिन चुनाव के दौरान ही तमिलनाडु के श्री पेरंबदूर में राजीव गांधी की नृशंस हत्या कर दी गई, इसके बाद कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा अमेठी से सांसद चुने गए, कैप्टन सतीश शर्मा 1996 में भी अमेठी से सांसद चुने गए लेकिन 2 साल बाद ही 1998 में जब फिर चुनाव हुए तो कैप्टन सतीश शर्मा भाजपा के प्रत्याशी डॉ संजय सिंह से पराजित हो गए, श्रीमती सोनिया गांधी ने 1999 में जब राजनीति में कदम रखा तो उन्होंने अपनी सासू मां श्रीमती इंदिरा गांधी की कर्मभूमि की जगह अपने पति की कर्मभूमि अमेठी को ही चुना, यहीं से वह पहली बार सांसद बनी, इसके बाद 2004 में अमेठी को अपने बेटे राहुल गांधी को सौंपकर सोनिया गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ने लगी, राहुल गांधी लगातार तीन बार चुनाव जीतकर चौथी बार मैदान में हैं और स्मृति ईरानी उन्हें कड़ी टक्कर दे सकती हैं, पिछले पांच सालों में स्मृति ईरानी 21 दौरे किए हैं और 26 दिन अमेठी में भी ठहरी हैं, भाजपा अमेठी के विकास को लेकर लगातार कांग्रेस पर हमला करती आ रही है, जैसे रेलवे लाइन का दोहरीकरण, ट्रामा सेंटर, पिपरी बांध और एचएएल की नई यूनिट के साथ अमेठी में एके-47 अत्याधुनिक शष्त्र बनाने का श्रेय भाजपा ले रही है, इसके पीछे स्मृति ईरानी का प्रयास भी रहा है और इसे वह अमेठी के मतदाताओं को समय-समय पर याद भी दिलाती हैं।

विशेष रिपोर्ट- अशोक त्रिपाठी

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