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उत्तर प्रदेश: जानिए बलिया से भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह मस्त का पूरा सियासी सफर, आखिरकार कौन बनेगा बलिया का बाजीगर


सिकन्दरपुर (बलिया) 26 मार्च को देर शाम जारी हुए बीजेपी के प्रत्याशियों की सूची ने जिले में एक बार फिर से राजनैतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। आपको बता दें कि जिले की दोनों प्रमुख लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है। सलेमपुर लोकसभा सीट से एक बार फिर से पार्टी ने वर्तमान सांसद रविंद्र कुशवाहा पर भरोसा जताते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया। जबकि दूसरी ओर बलिया से वर्तमान सांसद भरत सिंह का पत्ता कट चुका है और वर्तमान मे भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त को बीजेपी ने यहां से अपना उम्मीदवार बनाया है। 

आइए एक नजर डालते हैं वीरेंद्र सिंह मस्त के अब तक के सियासी सफर पर-

वीरेंद्र सिंह का जन्म  21 अक्टूबर 1956 में बलिया के दोकटी नामक गांव में हुआ। इन्होंने अपना प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा गृह जनपद से पूरा किया। इसके बाद इन्होंने B.A. की पढ़ाई के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। कमोबेश यही वो जगह थी जहां विरेंद्र सिंह  राजनीति के प्रति आकर्षित होने लगे। वीरेंद्र सिंह 1988-89 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद उन्होंनेे अपने राजनैतिक कैरियर में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।1989-92 भाजपा के जिला अध्यक्ष के तौर पर अपनी सेवा दी। 1991 में हुए आम चुनाव में पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। 1996-98 भाजपा किसान मोर्चा के राज्य अध्यक्ष रहे। अध्यक्ष रहते हुए इन्होंने गांव चलो अभियान को शुरू किया जिसका उद्देश्य किसान,ग्रामीण और विशेषकर कृषि के क्षेत्र में जागरूकता लाना था। 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत दूसरी बार सांसद चुनकर संसद पहुंचे।2000-2004 स्वदेशी जागरण मंच के स्टेट कोऑर्डिनेटर रहें। मई 2014 में हुए आम चुनाव में एक बार फिर से भदोही से सांसद चुनें गए। और अब भाजपा ने इन्हें बलिया से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। आपको बता दें वर्तमान में बलिया से भाजपा के ही भरत सिंह सांसद है। जिनका टिकट कट चुका है। आपको ज्ञात हो कि गठबंधन ने पहले ही इस सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। ऐसे में इन  दोनों रणबांकुरों का मुकाबला देखने लायक होगा।

होगी कांटे की टक्कर-

बलिया लोकसभा सीट के इतिहास पर अगर नजर डालें तो इस सीट पर पिछले कई चुनाव से समाजवादियों का दबदबा कायम रहा। वहीं दूसरी ओर भाजपा इस सीट पर पहली बार मोदी लहर में 2014 में जीत दर्ज की और भाजपा के भरत सिंह सांसद चुनें गए। आपको बता दें कि गठबंधन ने एक बार फिर से यह सीट नीरज शेखर को देकर एक बड़ा दांव खेला है। भाजपा ने सीट पर वर्तमान सांसद का पत्ता काटते हुए भदोही के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त को अपना उम्मीदवार घोषित किया। स्थानीय लोगों के अनुसार दोनों ही उम्मीदवारों के बीच एक भीषण घमासान होने जा रहा है। जहां एक तरफ अखिलेश और माया का गठबंधन है वहीं दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी की कप्तानी है। इस सीट पर इन दोनों पार्टियों के बीच कांटे की टक्कर होने के पूरे  स्पष्ट आसार दिखते हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कौन बनेगा बलिया का बाजीगर ?

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता, सत्यम राय

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