वाराणसी (ब्यूरो) - 5 अक्टूबर। सीमा सुरक्षा बल (बी.आर.ओ.) के फौज में इंजीनियर के पद पर कार्यरत शहीद मंगला पटेल की पत्नी श्रीमती शीला देवी एवं अपना दल के मंडल अध्यक्ष राजेश पटेल व जिला अध्यक्ष सुनील सिंह ने एक संयुक्त पत्रकार वार्ता करके उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर देश की सीमा पर शहीद जवान को आर्थिक सहायता एवं सरकारी नौकरी दिए जाने के मामले में भेदभाव का आरोप लगाया।
शहीद की पत्नी एवं नेताओं ने कहा कि शहीद मंगला प्रसाद पटेल सीमा सड़क बल के फौज में श्रीनगर में इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। जिनकी मृत्यु दिनांक 5-1-2018 को देश की सीमा पर सेवा के दौरान हिमस्खलन से हो गया था। शहीद एक किसान परिवार से हैं, उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उक्त घटना के बाद शहीद के आयर स्थित आवास पर सांत्वना देने पहुंचे भारत सरकार के पूर्व राज्य मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री महेंद्र नाथ पांडे ने बीस लाख रुपए सरकारी सहायता एवं शहीद परिवार के एक सदस्य को राज्य सरकार में सरकारी नौकरी दिए जाने का आश्वासन दिया था। ततपश्चात भारत सरकार की राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आर्थिक सहायता राशि बढ़ा कर पच्चीस लाख किये जाने, मृतक आश्रित को सरकारी नौकरी एवम शहीद के गाँव के विकास का आश्वासन दिया था। यह सब महज लफ्फाजी, लोकलुभावन बयानबाजी व धोखा साबित हुआ, आज तक शहीद की पत्नी द्वारा लगातार उक्त सरकार के नुमाइंदे एवं अधिकारियों के कार्यालय पर रोज रोज चक्कर काटने के बावजूद अभी तक मृतक आश्रित को नौकरी के संदर्भ में कोई भी कार्यवाही नहीं की जा सकी है।
अन्य नेताओं ने कहा है कि योगी जी के नेतृत्व वाली वर्तमान राज्य सरकार ने सरकार गठन के बाद सीमा पर शहीद होने वाले शहीदों के परिजन को राज्य सरकार में नौकरी देने के फैसले को कैबिनेट में मंजूरी दी थी। यह तय किया गया था कि अप्रैल 2017 के बाद उत्तर प्रदेश का जो भी जवान सीमा पर शहीद होगा उसके आश्रित को इस फैसले के तहत सरकारी नौकरी दी जाएगी, किंतु योगी सरकार अपने कैबिनेट के फैसले को लागू कराने में भी हीला हवाली एवं पैरवी के आधार पर भेदभाव कर रही है।
शहीद की पत्नी एवं अन्य नेताओं ने मंगला पटेल के परिजनों को एक करोड़ रुपए आर्थिक सहायता एवं परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार राज्य सरकार के फैसले के अनुरूप सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के अंदर मांगे पूरी नहीं की जाती है तो अपना दल के कार्यकर्ता शहीद के गांव के ग्रामीण एवं उनकी पत्नी अनशन के लिए बाध्य होंगे।
रिपोर्ट- वाराणसी ब्यूरो अब्दुल्ला हाशमी

