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वर्षा न होने से खरीफ की फसल के भविष्य को लेकर किसानों में बेचैनी


सिकन्दरपुर (बलिया) कहने के लिए मानसून ने दस्तक तो दिया है लेकिन वह कमजोर है। एक बात तो यह कि काफी विलम्ब से मानसून ने दस्तक दिया और दूसरी बात यह कि जैसी उम्मीद की जा रही थी उसके अनुरूप मानसून सक्रिय नहीं दिख रहा है। यानी अभी तक झमाझम बारिश नहीं हो सकी है। दूसरे प्रान्तों में भले मानसून सक्रिय है और विगत कई दिनों से भारी बारिश हो रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में अभी तक मानसून का सक्रिय न होना किसानों के लिए चिन्ता का विषय बना है। अधिकाँश जगहों पर पर्याप्त बारिश न होने से खरीफ की फसल के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। प्रतिदिन आकाश में रह-रहकर बादल छा जा रहे है और लगता है कि अब भारी वर्षा जरूर होगी, लेकिन कुछ देर बाद ही बादल छँट जाते है और तेज धूप निकल जा रहा हैैं। रात में भी आसमान में बादल छाये रहते है, लेकिन प्रातः होते ही आसमाान साफ हो जाता है। दो दिन पूर्व जब मानसून ने दस्तक दिया तो पूरे जनपद में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हुई। इससे किसानों में उम्मीद जगी कि अब लगातार बारिश होगी। लेकिन दो दिनों से निकल रही तेज धूप व भीषण गर्मी से पुनः तापमान में वृद्वि होने लगी है तथा बारिश न होने के कारण खेती सम्बन्धी काम काज अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। किसानों का कहना है कि आद्रा नक्षत्र के दस्तक दिये एक सप्ताह से अधिक समय बीत गया। जबकि आद्रा नक्षत्र में ही मक्के की बुआई की जाती है। बारिश के अभाव में खेतों की जुताई भी सम्यक रूप से नहीं हो पायी है। यदि एक सप्ताह के अन्दर पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो मक्के की बुआई काफी पिछड़ जायेगी, जिससे फसल पर बुरा प्रभाव पड़ने से उत्पादन में गिरावट आ सकती है। यही स्थिति धान उत्पादक किसानों की भी है। साधन सम्पन्न किसानों ने तो अपने निजी नलकूपों से सिंचाई कर धान के बेहन डाल दिया है और महंगे दर पर डीजल खरीद कर अपने नलकूप से बेहन की सिंचाई कर रहे है। लेकिन मध्यम वर्ग एवं गरीब वर्ग के किसान धान का बेहन डालने के लिए पर्याप्त बारिश होने का इन्तजार कर रहे है।उनका कहना है कि बेहन डालने में हो रहे विलम्ब के चलते उसकी रोपाई का कार्य भी विलम्ब से होगा। इस कारण धान की फसल पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। मौसम में हो रहे चढाव-उतराव व निकल रही तेज धूप को देख सूखा पड़ने की सम्भावना प्रबल हो गयी है। बलिया का पूर्वी भाग जहाँ नहर की सुविधा उपलब्ध नहीं है और उस क्षेत्र के अधिकाँश राजकीय नलकूप किन्हीं कारणो से बन्द पड़े है। ऐसी स्थिति में अधिकाँश किसान अपने खेतों की सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर है। यही कारण है कि आगामी खरीफ की फसल के भविष्य को लेकर किसानों में त्राहि-त्राहि मची हुई है।

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