प्यारे कविता चोर बंधुओं,
नित्य आप लोगो के लंका कांड सोशल मीडिया पर पढ़ पढ़ कर मन उकता चुका है! आपकी शान में लिखने को शब्द कम पड़ रहे है! जिस कवि की रचना आप अपने नाम से चस्पा कर रहे है, बडी अदबी के साथ मंचो पर पढ़ रहे है, अब यह छोटा काम बंद करें.. उसमे आपकी बदनामी हो रही है।
(खैर जो है नाम वाला वही तो बदनाम है) यह बात भी ठीक है! लेकिन आपको गौबर ही खाना है तो फिर भैंस का खाइये,पेट तो भरेगा!
मेरा सुझाव है अबकी बार किसी छोटे मोटे कवि की कविता चोरी न कर आप निराला, पंत, दिनकर, जैसे महाकवियों की रचना चोरी करके अपने नाम से चस्पा कर दें.. इसके दो लाभ होगे.. एक तो वे कवि जो बीना गोष्ठी पढ़े मंचो पर अपनी घटिया तुकबंदी को कविता बता कर पढ़ रहे है.. इसी बहाने वे इन महान रचनाओ से रूबरू होगें!
दूसरा फायदा उपरोक्त कोई कवि आपको आक्षेपित आरोपित करने भी नही आयेगा! कुछ कथित बुद्धिजीवियों द्वारा आपका उपहास उड़ाया जायेगा!
वह तो अब भी उड़ाया जा रहा है। समझ गए न आम के आम गुठलियो के दाम... तो देर किस बात की ढूंढ़े किसी बड़े कवि की रचना और चस्पा दो अपने नाम से....
आप का शुभचिंतक
बेबाक जौनपुरी

