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फूलों की नगरी मे पल रहा है अनगिनत बिमारियों को आमंत्रण देता बदबूदार नहर


सिकन्दरपुर (बलिया) स्थानिय क्षेत्र के सिकन्दरपुर थाना के समीप से गुजरती नहर जो हरदिया बॉध तक जाती है,जबकि नगरा मोड़ से गांग किशोर तक का अधिकतर इलाका रिहायशी  मे तब्दील हो चुका है,पर सिकन्दरपुर स्टेशन के पुर्वी व पंश्चिमी दोनो तरफ 500 मीटर तक ये नहर एक गंधभरे बदबूदार नाले व कूड़ेदान के रूप मे तब्दील हो चुकी है,जिसके चलते नहर के अगल बगल बसे  निवासी बहुत ही परेशान है,बताते चले की स्टेशन पर नहर के किनारे व आस पास बहुत पारिवारिक परिवार बसते है,फिर भी इस गंदे बदबुदार माहौल मे रहना इन तमाम परिवार वालो की मजबुरी का सबब बन कर रह गया है,स्टेशन पर तमाम होटल और बहुत सारे लोग जो बेरोजगारी से त्रस्त होकर ठेले पर व्यसाय करने वाले लोगो से भरा पड़ा है,जिनका अपना कुड़ा और गंदा पानी नाली के माध्यम से नहर मे प्रवाहित होता है जिससे जमा गंदा पानी स्थानिय परिवारों के लिये तमाम बिमारियों को आमंत्रित कर रहा है,जिससे यहाँ पर मोदी सरकार के "स्वच्छ भारत अभियान"पर धक्का तो लगा ही है पर स्थानीय निवासियों को शक हो रहा है कि यह अभियान खिलवाड़ तो नही या सच मायनो मे ग्राम पंचायत, जिला पंचायत, आदर्श नगर पंचायत को इन केन्द्रीय योजनाओं का सम्मान करना ही नही आ रहा ?
अक्सर यहा पर आम जनता को लघुशंका करते हुये देखा जाता है जिससे नहर किनारे बसे आम निवासियों के बच्चियाँ और औरते घर से निकलने मे संकोच करती है व कतराती भी है, पर इस मजबुरी को कौन समझे इसी आस मे स्थानीय निवासी किसी बदलाव के सपनों को संजोए बैठे है।
सबसे बड़े दुर्भाग्य की बात यह है कि इस सिकन्दरपुर बस चौराहे पर यात्री या आम नागरिकों के लिये एक मूत्रालय तक का निर्माण नही हो सका जिसके चलते आम जनता इस नहर को गंदा और बदबूदार बनाने को मजबूर है।
क्या स्थानिय व जिला प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नही जाता जबकि सारे अधिकारी इस नहर को पार करके ही गुजरते है,पर दुर्भाग्य की इनकी गाड़ियों के शानदार शीशे ऐसे मंजर को देखने ही नही देते।

अब प्रशासन पर कई सवाल ये उठते है पहला सवाल ये कि इस स्थानिय नहर की स्थिती इतनी बदतर क्यो है और इसके बदहाल स्थिती के लिये जिम्मेदार कौन है ?
अगर इसे नहर की संज्ञा दी गयी है तो इस नहर मे पानी आये कितने साल हो गये ?
नहर विभाग ने इस नहर की सफाई के लिये क्या कदम उठाये ?
जब नहर मे पानी ही नही आता तो इसे कुड़ादान और नाले के रूप मे क्यो पाला पोसा जा रहा है?
और भी बहुत सवाल है पर हर सवाल इस मामले मे खुद ही शर्मिंदा है अपने सवालों को लेकर जिसका जवाब कही से भी मिले ये उम्मीद ही आस्तित्व मे नही है।
आज के वर्तमान युग मे हम सभी खास़कर युवा वर्ग विकास और बढ़ावे की बात करते है पर ये संभव कैसे होगा इसका जवाब किसी के पास नही होता पर सच मायनों मे इसका जवाब यह है कि निश्चित तौर पर इस विकास और बढ़ावे के लिये हर नागरिक को अपनी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी व साथ मे प्रशासन भी हर संभव प्रयास व सहयोग करे,तभी जाकर हम सभी अपने घर,समाज, प्रदेश व देश को इन समस्याओं से निजात दिला पायेगे और खुद को स्वच्छ भारतीय अभियान का एक सिपाही समझ पायेगे व आने वाली पीढ़ियों को इस संस्कार से अवगत भी करा पायेंगे, गंदगी हटेगी पर सबके सहयोग से।
इस खबर के माध्यम से देश व प्रदेश मे इस अभियान के प्रणेता प्रधानसेवक मोदी जी व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी व सत्तापक्ष के  विधायक संजय यादव जी से स्थानिय निवासियों की पुरजोर अपील है कि वो तत्काल इस संबंध मे संज्ञान ले व स्वच्छ भारत अभियान को कमजोर होने से बचाये।

विशेष रिपोर्ट-विनोद कुमार गुप्ता

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