माता पिता की मौत के बाद बेसहारा हुईं दो बहनें, प्रशासन की पहल से जगी उम्मीद, 17 वर्षीय संजू 12वीं की छात्रा, बड़ी बहन मंजू की पढ़ाई छूटी, अब सवाल- दोनों बहनों का भविष्य सुरक्षित करने कब आगे आएंगे स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी?
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दो बहनों के सामने जिंदगी की कठिन चुनौती
सिकन्दरपुर (बलिया)। नवानगर विकासखंड के ग्राम पंचायत सिसोटार में अपनें माता-पिता को खो चुकीं दो बहनों के सामने जिंदगी की कठिन चुनौती खड़ी है। 17 वर्षीय संजू कुमारी अभी कक्षा 12वीं में पढ़ रही हैं, जबकि उनकी बड़ी बहन मंजू कुमारी (20) बारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। माता-पिता के साये से वंचित दोनों बहनें अब अपने भविष्य और जीवन यापन को लेकर चिंतित हैं। ऐसे मुश्किल समय में प्रशासन की ओर से मदद के लिए पहल शुरू होने से दोनों बहनों के जीवन में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी है।
➡️ मां-बाप चले गए… अब दो बहनों का सहारा कौन?
— खबरें आजतक Live - Khabre Aajtak Live (@khabreaajtakliv) September 6, 2026
➡️ मदद को आगे आया प्रशासन
➡️ अब जनप्रतिनिधियों व समाजसेवियों की बारी!
➡️ मां का आंचल छिना, पिता का साया भी उठा… अब दो बहनें पूछ रही हैं—हमारा अपना कौन?”
➡️ बलिया जिले के ग्राम पंचायत सिसोटार का मामला @dmballia @myogioffice pic.twitter.com/UXmcvTt6ZE
पहले मां का साया उठा, फिर पिता भी छोड़ गए साथ
ब्लॉक नवानगर अन्तर्गत ग्राम सिसोटार निवासी स्व. प्रेमचंद यादव की पत्नी का निधन करीब छह वर्ष पूर्व हो गया था। मां के निधन के बाद दोनों बहनों ने किसी तरह जीवन आगे बढ़ाया, लेकिन वर्ष 2026 में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से पिता प्रेमचंद यादव की भी मौत हो गई। पिता की मौत के बाद परिवार को शासन से निर्धारित सहायता भी प्राप्त हुई, लेकिन माता-पिता दोनों के चले जाने के बाद अब दोनों बहनों के सामने सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य का है। खासकर 17 वर्षीय संजू की पढ़ाई जारी रखने और दोनों बहनों के सुरक्षित जीवन-यापन की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
पढ़ाई जारी रख पाएगी संजू? मंजू के भविष्य का क्या होगा?
संजू वर्तमान में कक्षा 12वीं की छात्रा हैं। ऐसे में उनके सामने आगे की पढ़ाई जारी रखने की चुनौती है। वहीं बड़ी बहन मंजू पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। माता-पिता के निधन के बाद दोनों बहनों को आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक सहारे की जरूरत है। ऐसे में केवल तत्काल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी योजनाओं से दोनों को जोड़ना जरूरी है, ताकि वे परिस्थितियों के सामने मजबूर होकर अपने सपनों को छोड़ने के लिए विवश न हों।
मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन सक्रिय
मामले की जानकारी मिलने पर खंड विकास अधिकारी नवानगर विनोद कुमार बिंद ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बीडीओ के निर्देश पर ग्राम पंचायत अधिकारी एवं पंचायत सहायक ने दोनों बहनों से संपर्क स्थापित कर उनके संबंध में आवश्यक जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। प्रशासन की ओर से दोनों बहनों की पात्रता के अनुसार विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
लाभ हेतु योजनाओं का हों रहा परीक्षण
प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) समेत पात्रता के अनुरूप अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में लाभ की संभावनाओं का परीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही दोनों बहनों की परिस्थितियों और पात्रता को देखते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आयुष्मान कार्ड समेत अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं। यदि पात्रता के अनुरूप योजनाओं का लाभ दोनों बहनों तक पहुंचता है तो यह उनके लिए आगे की जिंदगी में महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकता है।
जनप्रतिनिधि व समाजसेवी कब बढ़ाएंगे मदद का हाथ?
प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेकर पहल शुरू कर दी है, लेकिन क्या दो बेसहारा बहनों के भविष्य की जिम्मेदारी केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित रहनी चाहिए? गांव और क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों से भी यह सवाल जुड़ा है कि वे कब इन बहनों की मदद के लिए आगे आएंगे? क्या कोई जनप्रतिनिधि उनकी पढ़ाई जारी रखने में सहयोग करेगा? क्या समाजसेवी दोनों बहनों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल करेंगे? क्या कोई संस्था उनकी शिक्षा और आवश्यक जरूरतों की जिम्मेदारी उठाने के लिए आगे आएगी? ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सरकारी योजना अपना काम कर सकती है, लेकिन समाज का संवेदनशील सहयोग किसी बेसहारा परिवार के जीवन को नई दिशा दे सकता है।
सिर्फ सहानुभूति नहीं, भविष्य सुरक्षित करने की जरूरत
दोनों बहनों की कहानी सिर्फ आर्थिक परेशानी की कहानी नहीं, बल्कि उन सपनों की कहानी है जिन्हें माता पिता के जाने के बाद अचानक सहारे की जरूरत पड़ गई है। संजू की पढ़ाई अभी जारी है और मंजू भी अपने भविष्य को नए सिरे से संवार सकती हैं, बशर्ते उन्हें सही मार्गदर्शन और सहयोग मिले। प्रशासन की शुरुआती पहल निश्चित रूप से उम्मीद जगाती है। अब जरूरत है कि सरकारी तंत्र के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी भी आगे आएं, ताकि दोनों बहनों को केवल तत्काल सहायता ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का ऐसा सहारा मिले जिससे वे सम्मान के साथ अपना भविष्य बना सकें। अब सवाल सीधा है- माता-पिता का साया खो चुकीं इन दो बहनों के सिर पर अब समाज और जनप्रतिनिधियों का हाथ कब रखा जाएगा?
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

