हनुमान जी के चित्र पर चढ़ा सियासी बैनर, भाजपा नेता की ओछी हरकत पर उठे सवाल, महावीरी झंडा के बैनर पर पवनसुत हनुमान का चित्र ढककर लगाया गया राजनीतिक बैनर, स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में बड़े पैमाने पर नाराजगी
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राजनीतिक बैनर को लेकर चर्चा तेज
सिकन्दरपुर (बलिया)। फूलों की नगरी के नाम से चर्चित सिकन्दरपुर कस्बे में इन दिनों हास्पिटल मोड़ पर स्थित एक बिजली के खंभे पर लगाएं गए एक राजनीतिक बैनर को लेकर चर्चाओं का बाजार बहुत ज्यादा गर्म है। मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि रथयात्रा महावीरी झंडा के बैनर पर अंकित पवनसुत हनुमान जी के चित्र के ऊपर कथित तौर पर भाजपा नेता संजीव कुमार वर्मा का राजनीतिक बैनर लगा दिया गया है। इससे हनुमान जी का चित्र बैनर के पीछे ढक गया है और इसे लेकर स्थानीय लोगों तथा हिंदूवादी संगठनों में बड़े पैमाने पर नाराजगी जताई जा रही है। लोगों के मुताबिक धार्मिक आयोजन से जुड़े एक बैनर पर भगवान हनुमान का चित्र लगा हुआ था। उसके ऊपर राजनीतिक प्रचार सामग्री लगा दिए जाने से हनुमान जी का चेहरा तक ढक गया। यही बात लोगों को सबसे अधिक आपत्तिजनक लग रही है।
➡️ सिकन्दरपुर में हनुमान जी के चित्र पर लगा राजनीतिक बैनर
— खबरें आजतक Live - Khabre Aajtak Live (@khabreaajtakliv) September 2, 2026
➡️ भाजपा नेता की हरकत पर उठे सवाल
➡️ सिकन्दरपुर में भाजपा नेता को लेकर नाराजगी
➡️ आस्था के ऊपर राजनीति?
➡️ भाजपा नेतृत्व से कार्रवाई की मांग@narendramodi #Ballia @BJP4UP @myogiadityanath pic.twitter.com/BL7P7cHGyo
आस्था के ऊपर राजनीतिक प्रचार क्यों?
स्थानीय लोगों का सवाल सीधा हैं कि राजनीतिक प्रचार के लिए क्या जगह की कमी इतनी बढ़ गई कि हिंदुओं के आराध्य देव पवनसुत हनुमान के चित्र को ही ढक दिया गया? लोगों का कहना है कि राजनीति अपनी जगह है और धार्मिक आस्था अपनी जगह। किसी भी राजनीतिक दल के नेता को अपनी प्रचार सामग्री लगाने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सकता है, लेकिन धार्मिक आयोजन से जुड़े बैनर पर भगवान के चित्र को ढककर राजनीतिक बैनर लगाना कम से कम संवेदनशीलता और मर्यादा के लिहाज से गंभीर सवाल जरूर खड़ा करता है।
पार्टी की राजनीति में राम हनुमान, उसी के नेता पर सवाल
भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में भगवान श्रीराम और पवनसुत हनुमान के प्रति आस्था सार्वजनिक रूप से दिखाई देती रही है। ऐसे में स्थानीय भाजपा नेता द्वारा कथित रूप से हनुमान जी के चित्र के ऊपर अपना राजनीतिक बैनर लगाए जाने की घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोई भी नेता कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह भगवान और धार्मिक आस्था से बड़ा नहीं हो सकता। राजनीति में पद और प्रतिष्ठा आती-जाती रहती है, लेकिन धार्मिक आस्था करोड़ों लोगों के विश्वास से जुड़ी होती है। यही कारण है कि लोगों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि यदि राजनीतिक प्रचार के लिए भगवान के चित्र को ढक दिया जाए तो फिर धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक मर्यादाओं का सम्मान कहां रह जाता है?
हिदायत के बावजूद नहीं हटाया गया बैनर?
भाजपा के ही एक नेता ने नाम सामने ना लाने की शर्त पर दावा किया कि संजीव कुमार वर्मा को इस संबंध में कई बार हिदायत दी गई कि वह महावीरी झंडा के बैनर पर हनुमान जी के चित्र के ऊपर लगाए गए अपने राजनीतिक बैनर को तत्काल हटा लें। दावे के मुताबिक इसके बावजूद भी बैनर नहीं हटाया गया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि यह दावा सही है तो मामला और गंभीर हो जाता है। क्योंकि तब सवाल केवल बैनर लगाने का नहीं, बल्कि आपत्ति सामने आने के बाद भी उसे हटाने में कथित तौर पर दिखाई गई उदासीनता का भी बनता है।
हिंदू संगठनों में घोर नाराजगी
घटना को लेकर स्थानीय हिंदूवादी संगठनों और लोगों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों से जुड़े पोस्टर और बैनर पर राजनीतिक प्रचार करते समय कम से कम धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि भगवान हनुमान की तस्वीर को ढककर किसी नेता की तस्वीर या राजनीतिक प्रचार को प्रमुखता देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।
क्या भाजपा नेतृत्व लेगा संज्ञान?
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर भाजपा संगठन की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पार्टी के किसी नेता द्वारा धार्मिक आयोजन से जुड़े बैनर पर इस तरह राजनीतिक प्रचार किया गया है, तो स्थानीय भाजपा नेतृत्व को मामले की वास्तविकता की जांच कर उचित कदम उठाने पर विचार करना चाहिए। राजनीतिक दलों के नेताओं से जनता केवल भाषणों में धर्म और संस्कृति के सम्मान की उम्मीद नहीं करती, बल्कि सार्वजनिक जीवन में उनके आचरण में भी इसकी झलक देखना चाहती है।
आस्था के ऊपर राजनीति नहीं
सिकन्दरपुर की जनता के बीच इस घटना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही उभरकर सामने आ रहा है कि राजनीति कितनी भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, उसे धार्मिक आस्था और मर्यादा से ऊपर नहीं रखा जा सकता। पवनसुत हनुमान करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में उनके चित्र को ढककर किसी नेता का राजनीतिक प्रचार सामने आना स्वाभाविक रूप से लोगों को खटक रहा है। नेता आते-जाते रहते हैं, राजनीतिक बैनर बदलते रहते हैं, लेकिन भगवान और आस्था सदियों से लोगों के विश्वास का आधार हैं। इसलिए किसी भी राजनीतिक दल के नेता को यह समझना होगा कि जनप्रतिनिधि या राजनीतिक कार्यकर्ता की पहचान उसके बैनर की ऊंचाई से नहीं, बल्कि उसके आचरण की मर्यादा से होती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि इस मामले पर स्थानीय भाजपा नेतृत्व क्या रुख अपनाता है और क्या धार्मिक आस्था से जुड़े इस विवादित प्रकरण में संगठन स्तर पर कोई संज्ञान लिया जाता है।
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

