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Ballia News: एसडीएम कार्यालय के सामने 4.29 लाख का आरओ प्लांट बेपानी, जहां से बुझनी थी फरियादियों की प्यास, वही वर्षों से पड़ा प्यासा, जिम्मेदार बेखबर

तहसील में फरियादियों की प्यास पर भारी अफसरों की बेपरवाही, 4.29 लाख का आरओ बना कबाड़, एसडीएम की नाक के नीचे ‘प्यासा’ आरओ, बूंद बूंद पानी के लिए तरसते फरियादी, लाखों का आरओ, सुविधा शून्य, तहसील प्रशासन की लापरवाही पर सवालों की बौछार

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मुख्य अंश (toc)

वर्षों से प्यासा हैं आरो वॉटर प्लांट

सिकन्दरपुर (बलिया)। रकार भले ही आमजन को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती हो, लेकिन सिकन्दरपुर तहसील परिसर में लगा आरओ वॉटर प्लांट सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और उसके रखरखाव की हकीकत को उजागर कर रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह प्लांट एसडीएम कार्यालय के ठीक सामने लगा है, फिर भी लंबे समय से खराब पड़ा है और अधिकारियों की नजर इसकी बदहाली पर नहीं पड़ रही। तहसील परिसर में आने वाले फरियादियों के लिए पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया गया यह प्लांट अब खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच तहसील पहुंचने वाले लोगों को पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान होना पड़ता है।

4.29 लाख की लागत से हुआ था प्लांट स्थापित

प्राप्त जानकारी के अनुसार सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना वर्ष 2019-20 के तहत करीब 4.29 लाख रुपये की लागत से एसडीएम कार्यालय के ठीक सामने आरओ वॉटर प्लांट स्थापित कराया गया था। इसका उद्देश्य तहसील परिसर में आने वाले आम नागरिकों और फरियादियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था।

सांसद ने किया था उद्घाटन

बताया जाता है कि तत्कालीन सलेमपुर सांसद रविन्द्र कुशवाहा के हाथों तत्कालीन एसडीएम अभय कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में इस आरओ वॉटर प्लांट का उद्घाटन किया गया था। उद्घाटन के समय जिस प्लांट को आम जनता की सुविधा के लिए बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा गया था, आज वही व्यवस्था रखरखाव के अभाव में सवालों के घेरे में है।

खराब पड़ा प्लांट, फिर भी जिम्मेदार बेखबर

तहसील परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में सूदूर क्षेत्रों से लोग अपनी समस्याओं और फरियादों को लेकर पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग, दूरदराज के गांवों से आने वाले ग्रामीण और अन्य महिला फरियादी शामिल होते हैं। भीषण गर्मी और भारी उमस के मौसम में पेयजल की जरूरत और बढ़ जाती है। ऐसे में तहसील परिसर का इकलौता आरओ वॉटर प्लांट यदि लंबे समय से खराब पड़ा हो तो लोगों की परेशानी का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। विडंबना यह है कि जिस स्थान पर प्लांट लगा है, वह एसडीएम कार्यालय के ठीक सामने है। इसके बावजूद लंबे समय से खराब पड़े प्लांट की मरम्मत अथवा उसे पुनः चालू कराने की दिशा में प्रभावी पहल न होना तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

सरकारी धन खर्च, सुविधा फिर भी नदारद

फरियादियों का कहना है कि सरकार आम जनता के पैसे से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जन सुविधाओं के लिए लाखों करोड़ों रुपये खर्च करती है। आरओ वॉटर प्लांट भी इसी उद्देश्य से स्थापित किए जाते हैं कि लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकें। लेकिन यदि ऐसे प्लांट लगाने के बाद उनके नियमित रखरखाव और समयबद्ध मेंटेनेंस की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तो सरकारी धन खर्च होने के बावजूद जनता को सुविधा नहीं मिल पाती। फरियादियों के मुताबिक यही स्थिति सिकन्दरपुर तहसील के आरओ वॉटर प्लांट की भी दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि समय रहते मेंटेनेंस कराया जाता तो शायद लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई यह सुविधा लंबे समय तक जनता के काम आ सकती थी।

कौन निभाएगा रखरखाव की जिम्मेदारी?

तहसील पहुंचे आम लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जा सकता है, जब उनका लाभ आम नागरिक को लगातार मिलता रहे। केवल किसी सुविधा का निर्माण करा देना पर्याप्त नहीं है। एक फरियादी ने कहा कि जनता के पैसे से लाखों रुपये खर्च कर आरओ प्लांट लगाया गया, लेकिन यदि कुछ समय बाद वह खराब होकर पड़ा रहे और उसकी मरम्मत न हो तो यह सरकारी धन और जनता दोनों के साथ अन्याय है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक सुविधाओं का नियमित निरीक्षण और रखरखाव होता रहे। लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से एक ओर सरकारी धन की उपयोगिता पर सवाल उठता है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को अपने अधिकार की बुनियादी सुविधा के लिए भी परेशान होना पड़ता हैं।

जिम्मेदारों से तत्काल कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने तहसील प्रशासन से मांग की है कि खराब पड़े आरओ वॉटर प्लांट का तत्काल निरीक्षण कराकर उसकी तकनीकी खराबी दूर कराई जाए और उसे जल्द से जल्द चालू कराया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए नियमित रखरखाव और निगरानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल

एसडीएम कार्यालय के सामने खड़ा यह बंद आरओ प्लांट महज एक खराब मशीन नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के रखरखाव और अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब देखना यह है कि 4.29 लाख रुपये की लागत से स्थापित इस जनसुविधा की बदहाली पर तहसील प्रशासन कब तक संज्ञान लेता है और कब तक फरियादियों को दोबारा स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिल पाती है।

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

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