सहतवार के मंच से सिकन्दरपुर विधानसभा की सियासत में उठे कई सवाल, समर्थकों में मायूसी, सियासी गलियारों में चर्चा तेज, नाम छूटना महज संयोग या कोई राजनीतिक संदेश
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राजनीतिक सियासत को लेकर चर्चा तेज
सहतवार (बलिया)। सहतवार में 29 अगस्त दिन शनिवार को आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में उस समय सिकन्दरपुर विधानसभा क्षेत्र की सियासत को लेकर चर्चा तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में मंच पर मौजूद एवं क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े कई नेताओं के नाम गिनाए, लेकिन सिकन्दरपुर विधानसभा क्षेत्र से अपनी राजनीतिक दावेदारी पेश करने वाले व डिफेंडर वाले नेता जी के नाम से चर्चित डॉ. विजय रंजन का नाम उनके संबोधन में सुनाई तक नहीं दिया।
लिस्ट में शामिल रहा इनका नाम
मुख्यमंत्री के संबोधन में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, प्रभारी मंत्री बलिया दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, अल्पसंख्यक मंत्री दानिश आजाद अंसारी, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, बांसडीह विधायक केतकी सिंह, बेल्थरा रोड विधायक हंसू राम, एमएलसी रविशंकर सिंह ‘पप्पू’, जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, सुनीता श्रीवास्तव, पूर्व सांसद भरत सिंह, पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला, पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी, पूर्व मंत्री राजधारी सिंह, पूर्व मंत्री नारद राय, पूर्व विधायक एवं निवर्तमान जिलाध्यक्ष संजय यादव, पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान और पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह सहित कई नेताओं का नाम लिया गया। लेकिन इस पूरी सूची में डॉ. विजय रंजन का नाम शामिल नहीं था। मुख्यमंत्री के संबोधन में उनका नाम न आने की बात सामने आते ही स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई।
सिर्फ संयोग या कोई राजनीतिक संदेश?
सियासत में नेताओं का नाम मंच से लिया जाना और किसी प्रमुख दावेदार का नाम छूट जाना कई बार चर्चा का विषय बन जाता है। हालांकि मुख्यमंत्री द्वारा किसी नेता का नाम न लिया जाना अपने आप में पार्टी नेतृत्व में उस नेता की स्थिति का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन सिकन्दरपुर की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इस घटना ने सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
नेताओं के नामों की सूची से नाम गायब
डॉ. विजय रंजन पिछले विधानसभा चुनावों के समय से क्षेत्र में सक्रियता दिखाते हुए अपनी राजनीतिक पकड़ और पार्टी के भीतर मजबूत स्थिति का दावा करते रहे हैं। उनके समर्थकों की ओर से भी उन्हें सिकन्दरपुर विधानसभा क्षेत्र में एक प्रभावशाली चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री जैसे बड़े मंच पर नेताओं के नामों की लंबी सूची में उनका नाम नहीं आना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
समर्थकों की उम्मीदों को लगा झटका?
कार्यक्रम के बाद डॉ. विजय रंजन के समर्थकों के बीच भी मुख्यमंत्री के संबोधन में उनका नाम नहीं लिए जाने को लेकर नाराजगी की चर्चा सामने आई। समर्थकों का मानना है कि क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले और पार्टी के कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले नेता का नाम मुख्यमंत्री के संबोधन में होना चाहिए था।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच उठें सवाल
वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि कोई नेता विधानसभा क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक स्थिति और पार्टी नेतृत्व तक अपनी पहुंच का दावा करता है, तो क्या बड़े राजनीतिक मंचों पर उसका प्रभाव दिखाई देता है? सहतवार के कार्यक्रम ने फिलहाल इस सवाल को और चर्चा में ला दिया है।
सिकन्दरपुर की सियासत में बढ़ेगा इंतजार
सिकन्दरपुर विधानसभा क्षेत्र में आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। ऐसे में डॉ. विजय रंजन की भूमिका और पार्टी के भीतर उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
मंचीय संकेतों की अपनी अहमियत
मुख्यमंत्री के संबोधन में नाम न आने को लेकर इसे पार्टी नेतृत्व की ओर से किसी स्पष्ट निर्णय या संदेश के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। इसके कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं। लेकिन राजनीति में प्रतीकों और मंचीय संकेतों की अपनी अहमियत होती है और इसी वजह से सहतवार के मंच से डॉ. विजय रंजन का नाम गायब रहना स्थानीय सियासत में चर्चा का नया विषय बन गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही
क्या मुख्यमंत्री के संबोधन में डॉ. विजय रंजन का नाम न आना महज संयोग था या सिकन्दरपुर की राजनीति में बदलते समीकरणों की कोई आहट? इसका जवाब आने वाले समय में पार्टी की गतिविधियों और नेतृत्व के फैसलों से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि सहतवार के मंच से डॉ. विजय रंजन का नाम न आने की चर्चा ने सिकन्दरपुर की सियासत का तापमान बढ़ा दिया हैं।
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

