पटना (ब्यूरो) देश के सियासत की दिशा और दशा तय करने में हर बार बिहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। 40 लोकसभा सीटों वाले बिहार पर सभी पार्टियों की पैनी नजर होती हैं, और जब बात लोकसभा चुनावों की हो तो बिहार कोे सबसे हाईप्रोफाइल सीटों में से एक पटना साहिब को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।साल 2008 में पटना लोकसभा क्षेत्र को दो भागों में बांट दिया गया, पहला पटना साहिब और दूसरा बना पाटलिपुत्र, 2009 में पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में पहला चुनाव हुआ, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा (बिहारी बाबू) ने बाजी मारी, 2014 में भी जनता में शत्रुघ्न सिन्हा को यहां से लोकसभा भेजा. यहां का चुनाव शुरू से ही फिल्मी सितारों के बीच होता रहा है, हर बार बाजी बिहारी बाबू ने मारी, पटना साहिब लोकसभा में 6 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से पांच सीट पर बीजेपी और एक पर आरजेडी के कब्जे में है।
1 = बख्तियारपुर
2 = दीघा
3 = बांकीपुर
4 = कुम्हरार
5 = पटना साहिब
6 = फतुहा
एक नजर पटना साहिब के सियासी सफर पर-
वैसे तो इस सीट का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, साल 2008 में पटना लोकसभा क्षेत्र को दो भागों में बांट दिया गया. पहला पटना साहिब और दूसरा बना पाटलिपुत्र। 2009 में इस सीट पर हुए पहले चुनाव में ही भाजपा के शत्रुघ्न सिन्हा ने जीत दर्ज किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के शत्रुघ्न सिन्हा को चार लाख 85 हजार वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस के कुणाल सिंह को दो लाख 20 हजार और जेडीयू के गोपाल प्रसाद सिन्हा को महज 91 हजार वोट से संतोष करना पड़ा था.
आसान नहीं शत्रुघ्न सिन्हा की राह-
इस बार भारतीय जनता पार्टी ने अपने पुराने सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट काट रविशंकर प्रसाद को अपना उम्मीदवार घोषित किया हैं। पटना साहिब संसदीय सीट इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए नाक की लड़ाई वाली सीट बन गई। पिछले दो चुनावों से भाजपा के शत्रुघ्न सिन्हा का इस सीट पर कब्जा हैं। लेकिन इस बार बिहारी बाबू का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी रविशंकर प्रसाद से होगा। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस सीट पर कड़ा मुकाबला तय है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कायस्थ बहुल क्षेत्र में मतदाताओं का रुझान किस ओर रहेगा।
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता, सत्यम राय

