सिकन्दरपुर (बलिया) एक जमाने मे कभी कांग्रेस की गढ़ कहें जानें वाली सलेमपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर से ब्राह्मण उम्मीदवार पर ही अपना दांव लगाया है, यहां पर पार्टी ने सन् 2004 व सन् 2009 में न सिर्फ दमदारी से चुनाव लड़ा बल्कि महज कुछ वोटों के अंतर से दूसरे नम्बर पर ठहर गयी, हालांकि 2014 के लोकसभा चुनावों मे मोदी लहर में यहां से पार्टी के पांव पूरी तरह उखड़ गए और मतदाताओं के महज 41 हजार मतों पर सिमट गया था, इस बार पार्टी ने सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से वाराणसी के पूर्व सांसद डॉ० राजेश मिश्र को अपना प्रत्याशी बनाया है, उनके सामने पार्टी को फिर से लड़ाई में खड़ा करने के लिए तथा 2004 व 2009 के प्रदर्शन को पुनः दोहराते हुए उसे नम्बर एक तक पहुंचाने की कठिन चुनौती है।
सन् 1952 से सन् 1984 तक हुए 8 लोकसभा चुनावों में से 7 बार कांग्रेस ने सलेमपुर से जीत दर्ज की हैं, सन् 1984 के बाद यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकली तो लम्बे समय तक नेपथ्य में रही, वहीं वर्ष 2004 व 2009 के आम चुनावों में पार्टी के प्रत्याशी डॉ भोला पांडे ने यहां पार्टी को जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया था, 2004 में यहां से सपा के हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा चुनाव जीते थे, उन्हें 1 लाख 95 हजार 570 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के भोला पांडे को 1 लाख 79 हजार 317 वोट हासिल हुए थे, इस प्रकार कांग्रेस महज 16 हजार 253 वोटों से चुनाव हार गयी थी, 2009 के चुनाव में भी डा. भोला पांडे ही कांग्रेस के उम्मीदवार रहे और इस बार भी पार्टी ने पुराने प्रदर्शन को पुनः दोहराया, हालांकि उस चुनाव में भी कांग्रेस 18 हजार 305 वोटों से चुनाव हार गयी थी, अलबत्ता 2014 की मोदी लहर में डॉ भोला पांडे अपना पुराना रिकॉर्ड बरकरार नहीं रख पाए थें और उन्हें महज 41 हजार 890 वोट ही मिल पाया था।
इस बार कांग्रेस ने यहां से वाराणसी के पूर्व सांसद डा. राजेश मिश्र को अपना उम्मीदवार बनाया है वैसे तो राजेश मिश्र देवरिया जिले के ही रहने वाले हैं लेकिन उनका कार्यक्षेत्र वाराणसी ही रहा हैं, हालांकि स्नातक एमएलसी (वाराणसी क्षेत्र) चुनावों के दौरान राजेश मिश्र का बलिया व सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से सीधा सीधा जुड़ाव रहा, 1984 में बीएचयू के छात्रसंघ उपाध्यक्ष भी रहे राजेश मिश्र के सामने पार्टी को फिर से पूरी मजबूती से खड़ा करने तथा पुराने रिकार्ड को दोहराने की कड़ी चुनौती उनके सामने खड़ी होगी, चुनाव के लिहाज से लोकसभा क्षेत्र में उनकी सक्रियता उस हद तक नहीं रही, उन्हें बचे हुए एक महीने में कार्यकर्ताओं, समर्थकों व कांग्रेस के मतदाताओं तक पहुंचना होगा, कांग्रेस पार्टी ने पूर्व जिलाध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह को सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया है, ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस ने इस बहाने सवर्ण मतदाताओं पर अपना निशाना साधा है।
सन् 1952 से सन् 1984 तक हुए 8 लोकसभा चुनावों में से 7 बार कांग्रेस ने सलेमपुर से जीत दर्ज की हैं, सन् 1984 के बाद यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकली तो लम्बे समय तक नेपथ्य में रही, वहीं वर्ष 2004 व 2009 के आम चुनावों में पार्टी के प्रत्याशी डॉ भोला पांडे ने यहां पार्टी को जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया था, 2004 में यहां से सपा के हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा चुनाव जीते थे, उन्हें 1 लाख 95 हजार 570 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के भोला पांडे को 1 लाख 79 हजार 317 वोट हासिल हुए थे, इस प्रकार कांग्रेस महज 16 हजार 253 वोटों से चुनाव हार गयी थी, 2009 के चुनाव में भी डा. भोला पांडे ही कांग्रेस के उम्मीदवार रहे और इस बार भी पार्टी ने पुराने प्रदर्शन को पुनः दोहराया, हालांकि उस चुनाव में भी कांग्रेस 18 हजार 305 वोटों से चुनाव हार गयी थी, अलबत्ता 2014 की मोदी लहर में डॉ भोला पांडे अपना पुराना रिकॉर्ड बरकरार नहीं रख पाए थें और उन्हें महज 41 हजार 890 वोट ही मिल पाया था।
इस बार कांग्रेस ने यहां से वाराणसी के पूर्व सांसद डा. राजेश मिश्र को अपना उम्मीदवार बनाया है वैसे तो राजेश मिश्र देवरिया जिले के ही रहने वाले हैं लेकिन उनका कार्यक्षेत्र वाराणसी ही रहा हैं, हालांकि स्नातक एमएलसी (वाराणसी क्षेत्र) चुनावों के दौरान राजेश मिश्र का बलिया व सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से सीधा सीधा जुड़ाव रहा, 1984 में बीएचयू के छात्रसंघ उपाध्यक्ष भी रहे राजेश मिश्र के सामने पार्टी को फिर से पूरी मजबूती से खड़ा करने तथा पुराने रिकार्ड को दोहराने की कड़ी चुनौती उनके सामने खड़ी होगी, चुनाव के लिहाज से लोकसभा क्षेत्र में उनकी सक्रियता उस हद तक नहीं रही, उन्हें बचे हुए एक महीने में कार्यकर्ताओं, समर्थकों व कांग्रेस के मतदाताओं तक पहुंचना होगा, कांग्रेस पार्टी ने पूर्व जिलाध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह को सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया है, ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस ने इस बहाने सवर्ण मतदाताओं पर अपना निशाना साधा है।
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

