रतसर (बलिया ) स्थानीय कस्बा क्षेत्र संत जोसेफ चर्च, रतसर, बलिया पर धूमधाम हर्षोल्लास के बीच ईसाई धर्मावलंबियो ने मनाया, ईस्टर का पर्व ईसाई धार्मिक ग्रंथ के अनुसार सूली पर लटकाए जाने के तीसरे दिन ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने की खुशी में मनाया जाता है। ईस्टर के उत्सव का प्रारंभ पवित्र शनिवार के साथ ही हो जाता है । यह साल की सबसे महत्वपूर्ण आराधना पद्धति है। जो पूर्ण अंधकार में ईस्टर की अग्नि यानी काफी बड़ी पास्का विषयक मोमबत्ती (जो कि ईशा के पुनरुत्थान का प्रतीक है) को जलाकर उस के आशीर्वाद और मिलान के संत एंब्रूस को समर्पित इक्सलटेट ( उल्लास गान) या ईस्टर की घोषणा के साथ शुरुआत फादर आनंद प्रकाश जी के द्वारा संत जोसेफ चर्च रतसर प्रकाश की इस आराधना के बाद पूर्ण विधि-विधान से कुछ पाठ किए गए।
इजाक के बलिदान लाल सागर के पारगमन और मसीहा के आने के भविष्य कथन की कहानियां बताएं। आराधना का एक हिस्सा महिमा गान (ग्लोरिया) और स्तुति गान (अल्लेलुया) तथा मृतोत्थान कि गोस्पेल की घोषणाओं से सजा हुआ था । उसके बाद ध्यान पाठ मंच से जल कुंड की तरफ हुआ । प्राचीन रूप से धर्मांतरण करके बने लोगों के लिए बपतिस्मा या दीक्षा लेने का आदर्श भी मिला और ईस्टर मनाया गया । एक दूसरे को लोगों ने पास्का की बधाइयां भी दिये। पूजा कार्यक्रम में मधुर संगीत व भजनों को भी गाया गया । पूजा कार्यक्रम रात्रि 3:00 बजे तक निर्बाध गति से चलता रहा। कार्यक्रम में फादर आनंद प्रकाश,ब्रदर मुदित, सिस्टर श्यामला, सिस्टर सेवरिन, सिस्टर मिशेल, सिस्टर ज्योतिका, राधाकिशन, जेम्स कौशल, अभिषेक, जॉन आदि सैकड़ो की संख्या में बालक - बालिकाएं, महिला -पुरुष , भक्तजन ईस्टर पवित्र पर्व के पूजा कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
रिपोर्ट- बलिया ब्यूरो लोकेश्वर पाण्डेय


