वाराणसी (ब्यूरो) - लोहता क्षेत्र के जरी कारीगरों के दिन अब बहुरने वाले हैं। जरी जरदोजी को नए अंजाम तक पहुंचाने के लिए साई इंस्टीट्यूट ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट के द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार की सहायता से संचालित हो रहे आई सी टी आधारित ज़री ज़रदोज़ी केंद्र का शुभारंभ हो चुका है जो आने वाले दिनों में महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल पेश करेगा।
साई इस्टीट्यूट आफ रूरल डेवलपमेंट , लोहता कुशवाहानगर, आई सी टी आधारित ज़री ज़रदोज़ी केन्द्र के द्वारा महिलाओं के हुनर को टेक्नोलॉजी के माध्यम से और निखार कर उन्हें स्वरोजगार करने की प्रेरणा दी जा रही है जिससे कि वे आत्म निर्भर बन कर अपनी आजीविका को आगे बढ़ा सकें '।इस केंद्र पर प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए मुस्लिम महिलाओं में काफ़ी उत्साह दिख रहा है, अब वो बिना किसी रोकटोक के अपने घरों से बाहर निकल कर पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर अपने परिवार को अच्छी से अच्छी सुविधा देने के लिए आतुर है ।
प्रतिनिधि के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में संस्था के डायरेक्टर अजय कुमार सिंह ने कहा कि मंदी के दौर से गुजर रहे जरी कारोबार के उत्थान के लिए ज़री ज़रदोज़ी केेंद्र मील का पत्थर साबित होगी। ज़री कारीगरों को उनका समुचित हक दिलाने के लिए एवं देश-विदेश से ज़री का कारोबार बढ़ाने के लिए संस्था के "हुनर - ए - बनारस" के ऑनलाइन पोर्टल के द्वारा बिक्री कराई जाएगी। इसके साथ ही संस्था द्वारा नवम्बर में ज़री महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव में जरी कारीगर खुद अपना स्टॉल लगाएंगी। इससे उनके काम और हुनर को नाम के साथ ही पहचान भी मिलेगी। साथ ही संस्था प्रवासी भारतीयों के लिये जनवरी 2019 में हो रहे कार्यक्रम में प्रतिभाग करेगी।
उन्होंने बताया कि आर्थिक मंदी और उचित मेहनताना नहीं मिलने के कारण जरी जरदोजी के हुनरमंद मजबूरन अन्य छोटे मोटे कामों में लग गए हैं। कई हुनरमंद कारीगर और उनके परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ज़री कारीगरों को एक प्लेटफार्म पर लाया जाएगा। ऐसे में ज़री ज़रदोज़ी केंद्र उन सभी महिला कारीगरों के लिए संजीवनी का काम करेगी।
रिपोर्ट- वाराणसी ब्यूरो अब्दुल्ला हाशमी



