दिल्ली- अभी हाल ही में एक कानून प्रस्ताव संसद में पारित हुआ। S. T/S.T act में केवल दलित की शिकायत मात्र पर सवर्ण की गिरफ्तारी हो जायेगी!
इससे कोई मतलब नही कि शिकायत झूठी है या सच्ची?
शिकायत कर्ता का दलित होना इस बात का प्रमाण होगा कि वह सत्य बोल रहा है। जाँच रिपोर्ट आने के बाद यदि शिकायत झूठी व असत्य पाई गई, तो झूठे शिकायत कर्ता को खिलाफ कोई कठोर कानून नहीं।
वाह रे मेरे देश के कर्णधारो वाह अद्भुत सोच के धनी है.. आप सभी...
सबसे ज्यादा गुनहगार वो सवर्ण वर्ग के सांसद है, जिन्हें प्रस्ताव के पक्ष में तालियाँ पीटते तनिक भी संकोच नही हुआ। याद रखो गाज तो तुम्हारे ऊपर भी गिर सकती है। विरोध में क्यों नही बर्हिगम किया आपने?
किसी भी भारतीय नागरिक के साथ अन्याय न हो.. यह दायित्व समस्त संविधानिक संस्थाओ का है! समरसता आपसी सद्भाव कायम रहे.. इसी लिये कानून में समानता का अधिकार दिया गया.. लेकिन क्या यही समानता है?
यदि हाँ तो भारत के विश्व गुरू बनने पर प्रश्नचिंह है।
आज कोई भी महिला किसी भी पुरूष पर बलात्कार का आरोप लगा दे... बीना सत्यता जाने पुरूष पहले सलाखों के पीछे होगा... जाँच रिपोर्ट में यदि शिकायत असत्य हुई तो पुरूष की धूमिल प्रतिष्ठा के लिये कौन जिम्मेदार होगा!
अपराधी सिद्ध हो जाने पर किसी भी मामले में कठोर दंड का मैं समर्थक हूँ! लेकिन केवल ईर्ष्या वश किसी की झूठी शिकायत पर गिरफ्तारी की मैं निंदा करता हूँ!
इस मामले में सभी सवर्ण वर्ग को एक मंच एक मत लेकर साथ खड़ा होना ही होगा।
सशक्त वर्ग को शोषित वर्ग के हितो को सम्मान देना ही होगा.. चाहे व सामान्य वर्ग है अथवा दलित वर्ग ।
क्या कर्णधार इस विषय पर सकारात्मक कदम उठायेगें?
अथवा सवर्ण वर्ग इसी तरह मूर्ख बनता रहेगा?
बेबाक जौनपुरी
राष्ट्रीय कवि
दिल्ली

