मन की बात
क्यों करता है कोई बलात्कार जैसा घिनौना कृत्य-
यह प्रश्न हम सभी के मस्तिष्क में होगा। आखिर वह कौन से कारण है, जो एक व्यक्ति को इतना घृणित कुकृत्य करने को प्रेरित करता हैं..?
एक सामान्य व्यक्ति जिसकी कल्पना मात्र से सिहर जाता है.. वहीं एक व्यक्ति उसी कार्य को कर गुजरता है!
इसका सीधा सा अर्थ है.. अपराधी सामान्य नहीं है, वह असामान्य है.. किन्तु समाज में अपराध करने से पहले तक सामान्य ही माना जाता है।
अचानक कोई अप्रिय घटना घटती है... फिर सकल समाज उस अपराधी के व्यवहार का विश्लेषण प्रस्तुत करने लगता है। यदि समाज इस तरह के लोगो को पहले ही चिन्हित कर ले... समय पर उसके व्यवहार को पढ़ ले, तो इस तरह के अपराध रूक सकते हैं!
समाज से पहले परिवार को इसका दायित्व लेना चाहिये!
यहां एक गौर करने वाली बात है.. जितने भी बलात्कारी अब तक मेरे संज्ञान में आये है.. उनमें से एक भी उच्च शिक्षा प्राप्त नही है! इसका सीधा सा अर्थ शिक्षा से वंचित व्यक्ति ही कुकृत्यों को अधिकतर अंजाम देता है!
निर्भया मामले में संलिप्त सभी अपराधी अशिक्षित है!
मंदसौर, कठुआ तमाम बलात्कार मामले में संलिप्त अपराधी शिक्षा विहीन (पशु) ही हैं।
जब मनुष्य के जीवन में शिक्षा नही होगी.. तो सदाचार.. संस्कार कैसे आयेगें?
दूसरा प्रमुख कारण इंटरनेट पर उपलब्ध पोर्न फिल्में, अश्लील साहित्य ....छोटे बच्चे से किशोर, बुजुर्ग सबके पास सहज उपलब्ध है। मैं कई बार गूगल पर कुछ सर्च करने जाता हूँ.. तो स्वत: इस तरह की साइट ओपन हो जाती है...यही किसी किशोर के साथ होगा. तो वह देखे बिना नही रहेगा.. और उसकी मानसिक प्रवृति पर इसका असामाजिक प्रभाव पड़ना तय है! हम सभी आज भी इन विषय से परिवार में चर्चा नहीं करते! अधूरा ज्ञान सदैव क्षयकारी होता है।
तीसरा कारण साहित्य में पनप आई अश्लीलता जिसमें स्त्री पक्ष को केवल भोग विलास का साधन मात्र बताया जाता है.. सी ग्रेड फिल्मी गीत व मंचीय फूहड़ कविताएं.. इस स्थिति का कारक हैं! अच्छा साहित्य मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न करता है.. जो व्यक्ति के अंदर संस्कार रोपित करता है! संस्कारवान व्यक्ति मर्यादा में रहता है।
ध्यान रहे कोई व्यक्ति जन्म से अपराधी नही होता.. उसे अपराधी बनाती है उसकी परवरिश.. उसके आस पास का वातावरण !
समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसके लिए जागरूक होना, पड़ेगा.. सरकार को ज्यादा से ज्यादा मनोचिकित्सालय की व्यवस्था करनी होगी.. पोर्न साइट पर नकेल कसनी होगी... शिक्षा साहित्य से प्रत्येक बच्चे का मौलिक व अनिवार्य ,अधिकार करना होगा! कोशिश हो प्रत्येक बच्चा अपने प्रारम्भिक शिक्षा (कक्षा 12 तक) मनोचिकित्सक की देख रेख में प्राप्त करे!
अश्लील फिल्मों.. उसके अश्लील गीतो.. मंच पर फूहड़ कविताओ पर रोक लगानी होगी! तब इस देश में निर्भया निर्भय विचरण करेंगी...!
बेबाक जौनपुरी की कलम से-



मुझे लगता है कि इन सारे कारण के अलावा बहुत ही बड़ा कारण है किसी से बदला लेने की भावना और ऐसी हालत में आदमी के लिए बदला लेने के लिए औरत सबसे कमजोर कड़ी साबित होती है . क्योकी हमारे सारे धर्म ग्रंथ अपने बदले के लिए महिलाओं को ही अपना शिकार बनाने की कहानियो से भरा हुआ है . दूसरा यहीकारण है कि पूंजीवाद ने महिलाओं को माल में तब्दील कर दिया जिसके कारण अस्लिलता का बाजार खड़ा हुआ .इसका अर्थ यह कि धर्म और पूंजिवाद ने ही बलात्कार को बढावा दिया है .
ReplyDeleteबिलकुल सही कहा आपने
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