Left Post

Type Here to Get Search Results !

"चिन्ता छोड़ करे चिन्तन" विनोद कुमार गुप्ता की कलम से


मैने एक जगह पढ़ा है, एक नब्बे वर्षीय महिला से किसी ने पूछा कि अगले जन्म में आप क्या बनना चाहेंगी और क्यों ? उस महिला ने जवाब दिया, मैं अपनी जिंदगी में सफल रही, मेरी जिंदगी बहुत अच्छे से गुजरी और अगले जन्म भी यही स्वरूप लेकर पैदा होना चाहूंगी। कारण यह है कि मैनें इस जन्म में बहुत सी ऐसी चिंताये और डर पाले जो कभी घटित ही नहीं हुए या यूं कहें उनके घटने की सम्भावनाएं न्यूनतम थी। इन चिंताओं के कारण मैने अपनी जिंदगी में बहुत सी चीजों का मजा नही लिया, बहुत सी चीजें नही सीखी, मै अगले जन्म में और उन चीजों का सुख उठाना चाहता हूं। इस जन्म की कुछ चिंताये मुझे रहती थी कि यदि मै रोलर - कोष्टर में बैठूं तो मै गिर कर मर जाऊंगी, यदि मै कार चलाऊंगी तो किसी को दबा दूंगी। बेबुनियादी चिंता के कारण बहुत सी चीजों से मैं वंचित रही। कहीं ऐसा तो नही हम भी अपनी जिंदगी की ढलान पर जब पलटकर देखें तो हमें भी ऐसा न महसूस हो कि बेकार की चिंता में हमारे बहुत से सुनहरे पल हमसे छिंन लिये थे।  सचमुच, हम इतनी सारी चिंताये पाल लेते हैं कि हमें जिंदगी साफ नही दिखाई देती और हम खुलकर अपने कार्यो को गति नहीं दे पाते। हमारे सिर पर भय का बोझ, हमारी सोचने की क्षमता और कार्य की गतिशीलता बहुत कम कर देता है। मै अपनी जिंदगी में कुछ ऐसे लोगों से मिला हूं, जिनमें अपार क्षमताये थी साथ ही अपार शंकाये भी थी। वे अपनी क्षमता के अनुसार न व्यापार में ऊंचाई पर पहुंच पाये और न ही जिंदगी के मजे ले पाये। ठीक इसके विपरीत एक ऐसे व्यक्ति से मिला जो आत्मविश्वाश से सराबोर रहता था। बड़ी-बड़ी समस्याएं उसके सामने बौनी दिखाई देती थीं। वह व्यक्ति कम पढ़ा-लिखा होने के बावजूद बहुत सफल व्यापारी व संकट मोचन कहलाता है। बहुत से निराश लोग उसके पास जाते है और वह अपनी बातचीत और समझाईश से उनकी अनावश्यक चिंताओं को दूर कर परिस्थितियों का सामना करने की हिम्मत पैदा कर देता है।  हकीम लुक मान के बारे में कहा जाता था कि वे जब पहाड़ों-जंगलों में औषधी की जड़ी-बूटी लेने जाते थे तो वन औषधी उनसे कहती थी कि मुझे लेलो मै पेट दर्द के काम आऊंगी तो कोई औषधि पौधा कहता था कि मेरा उपयोग आंख की रोशनी तेज करने में कर सकते हो। कहने का मतलब यह है कि हर बीमारी के इलाज हेतु वे जंगल से जड़ी-बुटी ले आते थे परंतु चिंता की बीमारी का इलाज उन्हें भी नही मिला। यह कहावत बन गयी की चिंता का ईलाज हकीम लुक वान के पास भी नहीं था। हर आदमी को घबराना नही चाहिए उसे धीरज रखकर हल ढूंढना चाहिए। ऐसा करना कठिन जरूर है पर असम्भव नहीं धीरे-धीरे हम अपनी आदतों पर नियंत्रण कर सकते है।  हम पर जब विपत्ति आये, कोई समस्या आये, कोई नुकसान हो तो हमें चिंता करने की जगह चिंतन करना चाहिए, हमें परिस्थिति का सामना अच्छी तरह से करना चाहिए। चिंता एक तरह से आदमी की ताकत को निचोड़ती है जबकि चिंतन, शक्ति के सही दिशा में उपयोग का रास्ता बता सकता है इसलिए मैं सबसे अनुरोध पूर्वक कहता हूं .......  जिंदगी में चिंता छोड़ चिंतन करना शुरू कर दे।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
image image image image image image image

Image   Image   Image   Image  

--- Top Headlines ---