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Big Breaking: बहदुरा में राहत वितरण पर उठे सवाल तो CM तक पहुंची 8 सूत्रीय मांग, विधायक रिजवी ने लिखा पत्र, 13 सितंबर के दौरे में ग्रामीणों ने बाढ़ राहत सामग्री में पक्षपात का लगाया था आरोप

अब बाढ़ प्रभावितों के लिए सपा विधायक मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में की राहत से लेकर रिंग बांध तक 8 सूत्रीय मांग, घाघरा नदी के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का पानी भर जाने से आम जनजीवन अस्त व्यस्त

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मुख्य अंश (toc)

तटवर्ती गांवों में बने बाढ़ जैसे हालात

सिकन्दरपुर (बलिया)। घाघरा नदी के उफान से सिकन्दरपुर विधानसभा क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में बने बाढ़ जैसे हालात के बीच राहत वितरण को लेकर उठी शिकायत के बाद अब राहत सामग्री व 8 सूत्रीय मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई है। सिकन्दरपुर विधानसभा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बहदुरा में 13 सितंबर 2026 दिन रविवार को दौरे के दौरान ग्रामीणों द्वारा राहत सामग्री वितरण में स्थानीय लेखपाल पर पक्षपात का आरोप लगाए जाने व बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के दौरें के बाद सपा विधायक मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत एवं आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने की मांग की है। विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि विधानसभा क्षेत्र सिकन्दरपुर में घाघरा नदी के किनारे बसे पुरुषोत्तम पट्टी, खरीद, जिन्दापुर, बिजलीपुर, बहदुरा, दियरा व पिलुई सहित अन्य गांवों में बाढ़ का पानी भर जाने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। भीषण कटान के चलते सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में समाहित हो चुकी है और कई स्थानों पर बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है।

पहले बहदुरा पहुंचे विधायक, अब मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

यह मामला अचानक सामने नहीं आया। 13 सितंबर को विधायक मोहम्मद जियाउद्दीन रिजवी ने बहदुरा गांव पहुंचकर बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की समस्याएं सुनी थीं। इसी दौरान गांव की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने राहत सामग्री के वितरण को लेकर स्थानीय लेखपाल संजय राम पर पक्षपात किए जाने का आरोप लगाया था। ग्रामीणों की शिकायत पर विधायक ने मौके से ही एसडीएम सिकन्दरपुर प्रवीण यादव से वार्ता की थी और दो-तीन दिनों के भीतर राहत सामग्री वितरित कराने का आश्वासन दिया था। विधायक ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि समय सीमा में राहत नहीं पहुंची तो वह तहसील का घेराव कर आमरण अनशन शुरू करेंगे। अब उसी घटनाक्रम को आगे बढ़ाते हुए विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत कराया है।

राहत सामग्री से लेकर पशुओं के चारे तक की मांग

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में विधायक ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही बाढ़ की चपेट में आए पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था कराने तथा पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाने की मांग की गई है। विधायक ने बाढ़ से नष्ट हुई फसलों का सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा दिलाने और क्षतिग्रस्त सड़कों की प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र मरम्मत कराने की भी मांग रखी है।

गरीबों के घर गिरे, उन्हें पक्का आवास देने की मांग

पत्र में बाढ़ से प्रभावित गरीब परिवारों की आवासीय समस्या को भी प्रमुखता से उठाया गया है। विधायक ने कहा है कि जिन गरीब परिवारों के मकान अथवा झोपड़ियां बाढ़ के कारण गिर गई हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सर्वे कराकर पक्का आवास उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निकट स्वास्थ्य केंद्रों पर 24 घंटे चिकित्सकों की उपलब्धता और पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है, ताकि बाढ़ के दौरान बीमारी फैलने की स्थिति में ग्रामीणों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके।

रिंग बांध की मांग, सरकार से बड़ा हस्तक्षेप

घाघरा नदी की कटान और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए विधायक ने संवेदनशील आबादी वाले क्षेत्रों में तत्काल अस्थायी रिंग बांध बनाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इससे गांवों, घरों और कृषि भूमि को बाढ़ एवं कटान से बचाने में मदद मिल सकती है।

राहत कब और कितनी पारदर्शिता से पहुंचेगी?

बहदुरा में ग्रामीणों की शिकायत से लेकर मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र तक पूरे घटनाक्रम ने बाढ़ राहत व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सभी पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों को समान रूप से राहत मिल रही है? क्या राहत वितरण की सूची पारदर्शी है? और जिन ग्रामीणों ने पक्षपात का आरोप लगाया है, उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच होगी? विधायक ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों, किसानों और पशुपालकों को समय रहते आवश्यक राहत मिल सकें। विधायक का यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब घाघरा नदी के उफान और कटान से प्रभावित ग्रामीण राहत, सुरक्षित आवागमन, स्वास्थ्य सुविधा और फसल नुकसान के मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री को भेजे गए इस पत्र के बाद प्रशासनिक स्तर पर राहत व्यवस्था कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है और बहदुरा सहित अन्य प्रभावित गांवों के लोगों को वास्तविक राहत कब तक मिलती है।

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

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