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बलिया: इस सीआरपीएफ के जवान की हार्ट अटैक से हुई मौत, सूचना मिलते ही परिवार में मच गया कोहराम


सिकन्दरपुर (बलिया) थाना क्षेत्र के सिसोटार गांव निवासी सीआरपीएफ मे इंस्पेक्टर के पद पर तैनात सुरेन्द्र राम पुत्र स्व० जग्गाराम उम्र 50 साल की रविवार की रात हार्ट अटैक होने से सेना के एक हास्पिटल मे अचानक मृत्यु हो गई, जैसे ही यह खबर सेना के अधिकारियों द्वारा परिवार को मिली वैसे ही परिवार समेत पूरे गांव में कोहराम मच गया, मृतक की पत्नी लक्ष्मीना देवी और पुत्र सत्यम व पुत्री पिंकी दहाड़ मार कर रोने लगे, जिसे देख कर बरबस ही वहां मौजूद सभी लोगों के आंखों में आंसू आ गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार को सुरेंद्र राम के पैर में तेज दर्द व तेज बुखार था, जिसकी सूचना सुरेंद्र राम ने अपने उच्चाधिकारियों को दी जिसके बाद आनन-फानन में सीआरपीएफ के जवानों ने उसे सेना के एक हॉस्पिटल में पहुंचाया जहां पर इलाज के दौरान हार्ड अटैक होने से सुरेंद्र राम की मृत्यु हो गई जिसकी सूचना सीआरपीएफ के उच्चाधिकारियों ने मृत जवान के परिवार को दी, जिसके बाद पूरे परिवार मे कोहराम मच गया, बतातें चलें कि उक्त मृतक जवान ने सन् 1987 मे सीआरपीएफ ज्वाइन किया था, वे अरुणांचल प्रदेश मे बटालियन जी-152 मे तैनात थे, अभी पिछले महीने ही छुट्टी पर 10 जुन को ही घर आयें थें और 13 जुलाई को  ड्यूटी ज्वाइन करने अपने घर से अरुणांचल प्रदेश के लिए रवाना हुए थे, मृतक जवान अपने चार भाई व पांच बहनों मे सबसें बड़े थे, सीआरपीएफ के जवान की मौत की खबर सुनते ही सोमवार की अल-सुबह से ही क्षेत्रीय लोगों का मृतक के घर पर आने जाने वाले लोगो का तांता लगा रहा, वहीं जवान का पार्थिव शरीर सोमवार की देर शाम तक सिसोटार गांव पहुचने की उम्मीद परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा जताई गई हैं।

पीढ़ी दर पीढ़ी देशसेवा मे बलिदान देता रहा है ये परिवार-
सीआरपीएफ के जवान सुरेंद्र राम का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी देश की सेवा करते हुए अपना बलिदान देता रहा है, सुरेंद्र राम के तीसरे नंबर के भाई सूरज कुमार भी सीआरपीएफ मे तैनात थे और सन् 2010 मे दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ मे आतंकियों के साथ हुए जबरदस्त मुठभेड़ में आतंकियों ने सूरज कुमार के वैन पर बम फेंक दिया था जिसमे अप्रैल 2010 में सुरज कुमार ने वीरगति प्राप्त किया था।

मृतक के परिवार मे दिखा सरकार के प्रति आक्रोश-
मृतक सुरेन्द्र राम के परिवार मे एक तरफ देशसेवा करते हुए वीरगति पाने का परिवार का सभी को फक्र है तो दूसरी तरफ सरकार से कोई खा़स मदद न मिलने का आक्रोश भी हैं, परिवार के सदस्यों का कहना है कि सूरज कुमार के मृत्यु के बाद सरकार द्वारा हमें कोई मदद नहीं मिली क्षेत्र में शहीद सूरज कुमार की मूर्ति लगाने की भी बात हुई थी लेकिन आज तक शहीद की मूर्ति भी नहीं लग पाई, भारत सरकार की दोहरी मानसिकता से मृतक के परिवार में आज भी सरकार के प्रति बड़े स्तर पर आक्रोश व्याप्त है।

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

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