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यूपी: पत्तल व थाली की जंग में सिसक रही हैं गंगा-जमुनी तहजीब, नौनिहालों की भावनाएं आहत, अभिवावकों मे उबाल

बलिया (ब्यूरों) देश की आजादी से पांच साल पहले ही ब्रिटिश हुकूमत के दम्भ को चकनाचूर करते हुए स्वतंत्रता की एक झलक देख लेने वाली बागी धरती की पहचान अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब से भी  है। यहां राबिया राधा के बटन टांक गर्व से फूले नहीं समाती तो दूसरी ओर रहमान मियां पड़ोसी जुगनू को सुबह-सुबह अपने घर बुला गुफ्तगू न कर लें तो उनको करार नहीं आता। गंगा-जमुनी तहज़ीब जब भी खतरे में पड़ी, यहां के लोगों ने आगे बढ़ सौहार्द की कड़ी को और मजबूती दी लेकिन यही तहज़ीब शिक्षा क्षेत्र सीयर अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय चौकिया मोड़ में पत्तल व थाली की आपसी जंग में सिसक रही है। हिन्दू बच्चों को थाली में मध्याह्न भोजन परोसा जाता है वहीं दूसरे सम्प्रदाय के बच्चों को विद्यालय परिवार द्वारा पत्तल में खाना दिया जाता है। इस स्थिति में संबंधित बच्चों की भावनाएं आहत हो रही हैं।  
नौनिहालों के मुताबिक यह सिलसिला अरसे से चला आ रहा है। घर जाकर ये बच्चे इस मामले की जानकारी जब अभिभावकों को दिए तो उनके आक्रोश का  ठिकाना न रहा। प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने किसी तरह उन्हें शांत किया। मामला जब "खबरें आजतक Live" की सुर्खियों में आया तब जाकर विभागीय अमला हरकत में आया। प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सुभाष गुप्ता के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी सीयर निर्भय नारायण सिंह ने इस मामले की पड़ताल तो की लेकिन दोषी जनों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करते हुए प्रधानाध्यापक विजय शंकर गुप्ता को क्लीन चिट दे दिया। साथ ही पूछने पर मीडिया को बताया कि बच्चों के कहने पर ही उन्हें पत्तल में भोजन दिया जाता है। विडंबना यह कि इस मसले में जिले के आला अधिकारी भी लगातार उदासीनता दर्शाते हुए रेत में शुतुरमुर्ग की तरह गर्दन छुपाए बैठे हैं। इसको लेकर अभिभावकों में जबरदस्त उबाल है और उन्होंने सड़क पर उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। 

आखिर क्या संदेश देना चाह रहा हैं ये विद्यालय परिवार-
एक ही स्कूल में बच्चों के साथ इस तरह का भेदभाव करते हुए विद्यालय परिवार आखिर क्या संदेश देना चाह रहा है। यह सवाल प्रबुद्ध वर्ग के बीच से छनकर आने लगा है। उनका कहना है कि सभी बच्चों का खून लाल तो इस तरह का भेदभाव कैसा। विभागीय जांच पर सवाल उठाते हुए इन लोगों ने कहा कि इसके पहले कि अभिभावक सड़क पर उतरें और सामाजिक समरसता खतरे में पड़े, जिला प्रशासन को ठोस कदम उठा लेना चाहिए।
पत्रकार दीपक ओझा की कलम से

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