सिकंदरपुर (बलिया) कठौड़ा स्थित ताल में अत्यधिक पानी भर जाने के कारण इस बार किसान धान की खेती नहीं कर पाएंगे जिससे किसानों को लाखों का नुकसान होगा । ज्ञात हो कि घाघरा नदी के तट पर बना रेगुलेटर से सैकड़ों गांव के बरसात का पानी नदी में चला जाता था । लेकिन बाढ़ विभाग की उदासीनता कहें या कर्मचारियों की लापरवाही इस बार कर्मचारियों द्वारा 15 जून को ही इस रेगुलेटर के फाटक को बंद कर दिया गया जिससे पूरे बरसात का पानी कठौड़ा ताल से लेकर नरहनी, मझवलिया गांव के घनी आबादी तक पहुंच गया है । जबकि प्रत्येक साल बाढ़ विभाग के कर्मचारी इस फाटक पर रहते थे और जब तक नदी का पानी नीचे रहता था तब तक फाटक को खोला जाता था लेकिन जब नदी का पानी ऊपर हो जाता था तो फाटक बंद कर दिया जाता था । लेकिन इस साल 15 जून को ही इस फाटक को बंद कर दिया गया । गांव वालों की मानें तो सैकड़ों बार फोन करने पर भी जेई द्वारा इस फाटक को नहीं खोला गया और यह कह दिया गया कि फाटक खराब है नहीं खुल सकता है । इस संदर्भ में गांव निवासी सोनू राय ने बताया कि पहली बार हम लोग धान की खेती नहीं कर पाएंगे जबकि इसके पहले ऐसी दिक्कत कभी नहीं आई जबकि धान का बेहन भी नुकसान होगा । किसान व शिक्षक श्री कृष्ण राम ने बताया कि इससे अधिक बरसात होती थी और ताल का पानी फाटक के माध्यम से नदी में गिर जाता था ऐसा पहली बार हुआ कि फाटक को 15 जून को ही बार विभाग द्वारा बंद कर दिया गया । अखिलेश राय ने बताया कि बाढ़ विभाग की लापरवाही से सैकड़ों एकड़ खेत खाली रह जाएंगे वहीं बाजरे व हरे चारे की फसल डूब गई है । किसान ओम प्रकाश राय ने बताया कि छोटे किसान तो भुखमरी के शिकार हो जाएंगे जिनके पास ज्यादा खेत हैं वह तो अपना काम चला लेंगे लेकिन छोटे किसानों को जिनका खेत ताल के पानी से डूब गया है सरकार द्वारा सुविधा उपलब्ध कराया जाना चाहिए ।
पहले अगर सूचना मिली होती-
सिकन्दरपुर (बलिया) सोमवार को उपजिलाधिकारी सिकन्दरपुर राजेश कुमार यादव ने मौके का निरीक्षण कर किसानों के हुए नुकसान पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पहले अगर सूचना मिली होती तो फाटक खुलवाया गया होता लेकिन अब तो नदी का पानी भी बराबर पर पहुंच रहा है।
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

