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बलिया: अपने पैतृक गांव पहुंचा इस सीआरपीएफ जवान का शव, गार्ड ऑफ ऑनर व नम आंखों से दी गई आखिरी विदाई


सिकन्दरपुर (बलिया) थाना क्षेत्र के सिसोटार गांव मे सोमवार की देर रात सीआरपीएफ के जवान का शव पैतृक गांव पहुंचते ही एक बार फिर पूरा माहौल गमगीन हो गया, मृतक जवान के पुत्र सत्यम, पुत्री पिंकी और धर्मपत्नी लक्ष्मीना देवी का क्रूर क्रंदन देखकर बरबस ही सभी की आंखों में आंसू आ गए, जवान का शव पैतृक गांव पहुंचने की खबर मिलते ही स्थानीय ग्राम वासियों और क्षेत्रीय लोगों की भीड़ मृतक जवान के घर पर जुटना शुरू हो गया, वहीं मंगलवार की सुबह मृत जवान को सीआरपीएफ के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया, इसके उपरांत मृतक जवान के बेटे सत्यम ने अपने पिता को मुखाग्नि दी, इस दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद ग्राम वासियों ने भी नम आंखों से मृतक जवान को आखरी विदाई दी।
बताते चलें कि बीते रविवार को सीआरपीएफ के जवान इंस्पेक्टर सुरेंद्र राम को ड्यूटी के दौरान पैर में तेज दर्द व तेज बुखार आ गया, जिसकी सूचना सुरेंद्र राम ने तत्काल अपने उच्चाधिकारियों को दी, जिसके बाद आनन-फानन में सीआरपीएफ के जवानों ने उसे सेना के एक हॉस्पिटल में पहुंचाया जहां पर इलाज के दौरान हार्ड अटैक होने से सुरेंद्र राम की मृत्यु हो थी, ज्ञात हो कि उक्त मृतक जवान ने सन् 1987 मे सीआरपीएफ ज्वाइन किया था, और वे अरुणांचल प्रदेश मे बटालियन जी-152 मे तैनात थे, अभी पिछले महीने ही छुट्टी पर 10 जुन को ही घर आयें थें और 13 जुलाई को ड्यूटी ज्वाइन करने अपने घर से अरुणांचल प्रदेश के लिए रवाना हुए थे।

पीढ़ी दर पीढ़ी देशसेवा मे बलिदान देता रहा है ये परिवार-
सीआरपीएफ के जवान सुरेंद्र राम का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी देश की सेवा करते हुए अपना बलिदान देता रहा है, सुरेंद्र राम के तीसरे नंबर के भाई सूरज कुमार भी सीआरपीएफ मे तैनात थे और सन् 2010 मे दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ मे आतंकियों के साथ हुए जबरदस्त मुठभेड़ में आतंकियों ने सूरज कुमार के वैन पर बम फेंक दिया था जिसमे अप्रैल 2010 में सुरज कुमार ने वीरगति प्राप्त किया था।

मृतक के परिवार मे दिखा स्थानीय प्रशासन के प्रति आक्रोश-
मृतक सुरेन्द्र राम के परिवार मे एक तरफ देशसेवा करते हुए वीरगति पाने का परिवार का सभी को फक्र है तो दूसरी तरफ मृतक जवान के परिवार को स्थानीय प्रशासन से घोर नाराजगी भी है, मृतक के पुत्र सत्यम ने बताया कि पिता के मौत के बाद अभी तक कोई भी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी हमारे घर नहीं आया, हमें उम्मीद थी कि पापा के अंतिम संस्कार के दिन प्रशासनिक अधिकारी हमारे दुखों मे और पापा की अंतिम यात्रा मे जरूर शामिल होगें, पर स्थानीय प्रशासन ने दुख की इस घड़ी मे हमे बहुत निराश किया है, हमे स्थानीय प्रशासन से ऐसी कतई उम्मीद नही थी।

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

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