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गुजरात: क्या शाह संभाल पायेंगे आडवाणी की विरासत, एक नजर गांधीनगर के चढ़ते सियासी पारे पर


गांधीनगर (गुजरात) देश के सियासत की दिशा और दशा तय करने में हर बार गुजरात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। 26 लोकसभा सीटों वाले गुजरात पर सभी पार्टियों की पैनी नजर होती हैं, और जब बात लोकसभा चुनावों की हो तो गुजरात कोे सबसे हाईप्रोफाइल सीटों में से एक गांधीनगर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साबरमती नदी के पश्चिमी तट पर स्थित गांधी नगर का नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया। गांधी नगर को 'हरित नगर' यानी कि 'ग्रीन सिटी' भी कहा जाता है। महात्मा गांधी की कर्मभूमि रही गांधीनगर को भाजपा का पारंपरिक सीट कहा जाता है। लालकृष्ण आडवाणी इस सीट से 6 बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। लोकसभा सीट के अन्तर्गत गुजरात विधानसभा की 7 सीटें आती है-
1 = साबरमती
2 = नारायणपुरा
3 = बेजालपुर
4 = सानंद
5 = कलोल
6 = गांधीनगर उत्तर
7 = घटोलडिया

गांधीनगर लोकसभा सीट का सियासी इतिहास-

साल 1967 में यहां हुए पहली आम चुनाव कांग्रेस से सोमाचंद भाई सोनालंकी ने जीत दर्ज किया। इसके बाद साल 1971 में भी यहां की सत्ता कांग्रेस के ही पास रही, 1977 का चुनाव में भारतीय लोकदल के पुरुषोत्तम मालवंकर ने यहां जीता, लेकिन 1980-1984 में यहां कांग्रेस का शासन रहा लेकिन 1989 में यहां पहली बार कमल खिला और शंकर सिंह वाघेला यहां से सांसद चुने गए और तब से लेकर अब तक इस सीट पर केवल भाजपा का ही राज है। 1991 में मोदी के सलाह पर आडवाणी गांधीनगर में लड़ने पहुंचे बाघेला को सीट खाली करना पड़ा और उनका पर्चा भरते वक्त साथ में मोदी और अमित  शाह भी मौजूद थे, अमित शाह ने ही आडवाणी के चुनाव प्रचार का जिम्मा उठाया। 1996 में यहां से देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी भी चुनाव जीते थे, इसके बाद से हुए चुनाव में अब तक यहां से केवल लाल कृष्ण आडवाणी ही जीतते चले आ रहे हैं, दूसरे शब्दों में कहे तो यह सीट और आडवाणी एक-दूसरे के पर्याय बन चुके है।

गांधीनगर की सियासी रण में अमित शाह और शंकर सिंह वाघेला होंगे आमने सामने 

गांधीनगर सीट से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव के मैदान में उतर रहे हैं और उनको चुनौती देने के लिए विरोधियों ने भी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।जानकारी के मुताबिक गांधीनगर लोकसभा सीट पर गुजरात के कद्दावर नेता शंकर सिंह वाघेला बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को टक्कर दे सकते हैं। एनसीपी ने ये संकेत दिए कि वो शंकर सिंह वाघेला को गांधीनगर से उम्मीदवार बना सकती है। गुजरात में एनसीपी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारा अभी तक नहीं हुआ है लेकिन एनसीपी ने अभी से गांधीनगर सीट पर अपना दावा ठोंक दिया रहा हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या शंकर सिंह वाघेला को मिलता है गांधी नगर की जनता का प्यार या एक बार फिर से गांधीनगर होगा भाजपा की कब्जे में ?

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता, सत्यम राय

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