सिकन्दरपुर (बलिया) पिछले हफ्ते सिकन्दरपुर में भारतीय जनता पार्टी के विजय संकल्प यात्रा में संगठन के पदाधिकारियों का बाहर रहना बिलकुल ही अप्रत्याशित नहीं था, इसकी पृष्ठभूमि भाजपा प्रत्याशी के नाम की घोषणा के बाद से ही बन रही थी, इसकी भनक रविंद्र कुशवाहा एवं उनके समर्थकों को भी थी, परंतु पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने मामले में सख्त कार्यवाही के बजाय शुरू से ही नरम रुख अपनाया अब चुनाव पर भी इसका असर साफ साफ दिखने लगा है।
सलेमपुर लोकसभा सीट के साथ साथ 5 विधानसभा क्षेत्र भाटपार रानी, सलेमपुर, बेल्थरा रोड, सिकन्दरपुर व बांसडीह इनमें मे से तीन पर भाजपा का ही कब्जा है, लेकिन जनप्रतिनिधियों व संगठन के बीच आपसी तालमेल व सामंजस्य नहीं है, इससे स्पष्ट है कि सलेमपुर संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सभी विधानसभाओं में गुटबाजी चरम पर चल रही है, संगठन में शामिल स्थानीय पदाधिकारी एवं सदस्य अपने क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी की मदद करने के बजाय दूसरे संसदीय क्षेत्र में जाकर तन मन और धन से भाजपा प्रत्याशियों का प्रचार कर रहे हैं।भाजपा कार्यकर्ताओं से पूछने पर कह रहे हैं कि जहां सम्मान मिल रहा है वहां संगठन के लोग पूरी ताकत से लगे हैं, अगर संगठन के पदाधिकारियों का यही रवैया जारी रहा तो सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार को जीतना मुश्किल होगा, कांग्रेस प्रत्याशी राजेश मिश्रा के मैदान मे आ जाने के बाद वैसे ही चुनाव और रोचक होने की उम्मीद जताई जा रही है, भाजपा उम्मीदवार रविंद्र कुशवाहा का गणित कांग्रेस नेता राजेश मिश्रा के आने के बाद बिगड़ता दिखाई दे रहा है, कांग्रेस हाईकमान ने सलेमपुर संसदीय क्षेत्र से राजेश मिश्रा को चुनाव लड़ाने का निर्णय कर भाजपा प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ा दी है, भाजपा कुशवाहा और राजभर मतदाताओं के साथ साथ सामान्य वर्ग के मतदाताओं एवं युवाओं से उम्मीद लगाए हुए हैं, साथ ही पिछली सरकार द्वारा किए गए कामों से भी उसे उम्मीद है, वहीं गठबंधन प्रत्याशी के रूप में आर एस कुशवाहा बसपा प्रदेश अध्यक्ष अगर चुनाव मे डटे रहते है तो वह भाजपा प्रत्याशी को कमजोर करने मे पुरी तरह कामयाब होगे, सबकुछ के वावजूद भी सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र किस करवट घूमेगा, इस पर लगातार सस्पेंस बना हुआ है।
रिपोर्ट- पीएमए

