लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बज चुका है। सभी पार्टियों ने अपनी कम कस ली है। सत्ता पाने के लिए अब नेता एड़ी चोटी का जोर लगाने लगे। सभी सीटों पर घमासान शुरू हो चुका है। आज बात करेंगे उत्तर प्रदेश के हाई-प्रोफाइल सीट मथुरा के बारे में। यमुना किनारे बसे मथुरा संसदीय क्षेत्र की पहचान भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली से है। राजनीति में कांग्रेस, भाजपा और रालोद यहां से चुनाव जीतती रही हैं। बाहरी प्रत्याशी भी चुनाव जीत कर संसद तक पहुंचते रहे हैं। वर्तमान में फिल्म सिटी की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी सांसद हैं।
मथुरा जिला 3,709 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल है. और यहाँ की जनसँख्या 2011 की जनगणना के अनुसार, 2,541,894 है. यहाँ मतदाताओं की संख्या 1,341,649 है, जिसमें 593,726 महिला और 747,923 पुरुष मतदाता हैं. यहाँ की औसत साक्षरता दर 72.65% है. यहाँ की पुरुष साक्षरता दर 84.39% है और महिला साक्षरता दर केवल 54.93% है.
मथुरा के सियासी सफर पर एक नजर-
पहले लोकसभा चुनाव में यहां से निर्दलीय प्रत्याशी राजा गिरिजा शरण ने जीत दर्ज की थी. 1957 में हुए लोकसभा चुनाव में एक बार फिर से निर्दलीय प्रत्याशी राजा महेंद्र प्रताप ने जीत दर्ज किया। लेकिन उसके बाद 1962 से 1977 तक लगातार तीन बार कांग्रेस पार्टी ने यहां जीत दर्ज की. 1977 में चली सत्ता विरोधी लहर में कांग्रेस को यहां से हार का सामना करना पड़ा और भारतीय लोकदल मनीराम बागड़ी ने जीत हासिल की।1980 में जनता दल (सेक्यूलर) के चौधरी दिगंबर सिंह ने यहां से चुनाव जीता, लेकिन 1984 में कांग्रेस ने एक बार फिर यहां से जोरदार जीत हासिल की. इस जीत के साथ ही कांग्रेस के लिए यहां लंबा वनवास शुरू हुआ और 1989 में जनता दल के प्रत्याशी ने यहां जीत दर्ज की. इसके बाद यहां लगातार 1991, 1996, 1998 और 1999 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की. इस दौरान चौधरी तेजवीर सिंह लगातार 3 बार यहां से चुनाव जीते.हालांकि, 2004 में कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह ने यहां से वापसी की. 2009 में बीजेपी के साथ लड़ी रालोद के जयंत चौधरी ने यहां से एकतरफा बड़ी जीत दर्ज की. लेकिन 2014 में चली मोदी लहर में अभिनेत्री हेमा मालिनी ने 50 फीसदी से अधिक वोट पाकर जीत दर्ज की।
आसान नहीं 'ड्रीम गर्ल' की राह-
भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में भाजपा की राह आसान नहीं रहने वाले हैं। आपको ज्ञात हो कि 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा की हेमामालिनी में आरएलडी के जयंत चौधरी को लगभग तीन लाख से ज्यादा मतों के भारी अंतर से शिकस्त दिया था। आरएलडी के उम्मीदवार जयंत चौधरी को 2,43,890 मत मिले थे और वही बीएसपी के उम्मीदवार पंडित योगेश कुमार द्विवेदी को 1,73,572 मत मिले, और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार चंदन सिंह 36,673 मतों पर सिमट गये। अगर इन तीनो पार्टी को मिले मतों को जोड़ा जाए तो भाजपा को कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है। खबरों की मानें तो यह सीट आरएलडी के खाते में जाएगा लेकिन इस सीट से आरएलडी का उम्मीदवार कौन होगा ये अभी समय के गर्भ में है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या हेमा मालिनी एक बार फिर से मथुरा में कमल खिला पाएंगी या गठबंधन की जीत होगी ?
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता, सत्यम राय

