रतसर, बलिया:स्थानीय कस्बा क्षेत्र के पकड़ीतर मुख्य बाजार में जहाँ दीपावली पर आमतौर पर माँ लक्ष्मी जी की प्रतिमा स्थापित होती है,वही श्री श्री काली पूजा समिति पकड़ीतर के तत्वावधान में माँ काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है ।इस अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किये जाते है तथा बड़ी धूमधाम से काली पूजा मनाई जाती है ।रतसर के हृदय स्थल जहाँ मुख्य बाजार लगता है,इन दिनों में दीपावली से 15 दिन पूर्व ही स्थान खाली कराके पांडाल बनाने तथा उसकी साज सज्जा का काम होने लगता है ।पांडाल के एक तरफ प्राथमिक विद्यालय रतसर टाउन तो दूसरी तरफ क्षेत्र की प्रमुख जामा मस्जिद स्थित है ।शुक्रवार को एक तरफ नमाज़ तो दूसरी तरफ काली पूजा यह हमारे कस्बे के गंगा जमुनी तहजीब का एक अनूठा उदाहरण है।हिन्दू व मुस्लिम आपसी मिल्लत से एक दूसरे के त्योहारों को सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाते है ।श्री श्री काली पूजा समिति पकड़ीतर द्वारा अपने 37वे वर्ष में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया ।माँ काली प्रतिमा के विसर्जन का दिन रविवार होने के कारण शनिवार को ही मूर्ति को चलायमान कर दिया गया था ।माँ काली-दुर्गा की अनन्य भक्त जानकी देवी चाहे वो कही भी रहे काली पूजा में उपस्थित रहती है ।माँ की तांत्रिक आराधना करते हुए जानकी देवी अपने दोनों हाथों में गर्म खप्पर उठाती है उसके बाद ही विसर्जन जुलूस आगे बढ़ता है ।जानकी देवी अपने बुजुर्ग हाथों में गर्म खप्पर लेकर विसर्जन स्थल तक चलती है ।आश्चर्य की बात है कि उनके हाथ जलते तक नही।
माँ काली प्रतिमा का जुलूस गाजे-बाजे के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में रतसर बाजार होते हुए गांधी आश्रम चौराहे पहुँचा जहा से पुनः वापस रतसर बाजार होते हुए दक्षिण चट्टी तक गया।गांधी आश्रम चौराहे से जुलूस को वापस करने में प्रशासन को काफी मसक्कत करनी पड़ी ।सैकडों की संख्या में श्रद्धालु नाचते गाते जुलूस में चल रहे थे ।जुलूस की भव्यता देखते बन रही थी ।त्यौहारों के बीच क्षेत्रीय जनता में हर्षोल्लास का माहौल है । कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर एक प्लाटून पी ए सी ,20 कांस्टेबल एक फायर सर्विस की व्यवस्था की गई थी ।इसके अलावे थानाध्यक्ष गड़वार राम सिंह,चौकी प्रभारी रतसर देवेंद्र नाथ दुबे,हेड कॉन्स्टेबल नंद लाल सिंह,सिपाही अमित सिंह,अजय भारती, संतोष यादव,सुरेंद्र निषाद,गोविंद सिंह मूर्ति विसर्जन तक मौजूद रहे ।
रिपोर्ट- संवाददाता डॉ अभिषेक पाण्डेय


