सिकन्दरपुर (बलिया) अक्टूबर का महिना शुरू हो चुका है बारिश का दुर दुर तक पता नही है ऐसे मे किसानों के सैकड़ों एकड़ धान की फसल सूखने के कगार पर है, किसान इस उम्मीद मे जी रहे थी की सिकन्दरपुर के नहर मे पानी आयेगा तो धान की फसल को सुखने से बचा लिया जायेगा पर नहर मे पानी आने के वजाय पुरी नहर कुड़े करकट, झाड़ पतवार से पटी हुई हैं और वर्तमान मे यह नहर एक नाले के रूप मे तब्दील हो चुकी है।
किसानों का कहना है कि इसी समय धान मे बालियां आती है, पर फसल को पर्याप्त पानी नही मिलने से पुरी फसल सुखने के कगार पर पहुंच चुकी है, अभी तक फसल मे जितनी लागत लग चुकी है उतना भी अब फसल से निकालना मुश्किल है, किसान दिनेश राजभर का कहना है कि सरकार किसानों की हित की बात करती है पर जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है, इस सरकार मे डीजल के दाम इतने बढ़ गये है कि ट्यूबेल से फसलो को पानी देना हर किसी के लिए संभव नही है।
बताते चले कि 18 सितंबर 2018 को तहसील सिकन्दरपुर मे आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस पर कमिश्नर को भी प्रार्थना पत्र देकर किसानों ने नहर मे पानी छोड़े जाने की मांग की थी, पर विभागीय उपेक्षा के चलतें पिछले एक साल से इस नहर मे पानी के नाम पर एक बूंद पानी तक नही आया ना ही इस नहर की कोई साफ सफाई की गई है, जिसको लेकर किसानों मे बड़े स्तर पर आक्रोश व्याप्त है। हालांकि विभाग का यह मानना है कि धान की फसल के दिनों में हेड से टेल तक पानी कभी भी नहीं पहुंच पाता है क्योंकि किसान जगह-जगह नहर को बंद कर बाधित कर देते हैं कई बार इसके लिए मुकदमा आदि किए गए लेकिन किसान मानते नहीं हैं और नहर को जगह-जगह बांधकर पानी चलाने लगते हैं जिससे टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है।

