लखनऊ- सूबें के अलीगढ़ और आगरा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों को अवैध तरिके से कब्जा कर फर्जी टिकटों पर यात्रा करवाए जाने के संबंध में परिवहन निगम प्रबंधन ने अपने 65 कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही की है, यह कार्यवाही तक की सबसे बड़ी कार्यवाही के रूप में देखा जा रहा है, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक पी. गुरुप्रसाद ने दो रीजन अलीगढ़ व आगरा के क्षेत्रीय प्रबंधकों, 3 एआरएम, 6 यातायात अधीक्षकों और 3 नियमित कर्मियों यानी टोटल 14 को निलंबित कर दिया है वहीं 51 संविदा कर्मियों को नौकरी से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।अपर प्रबंधक निदेशक डॉक्टर बीडीआर तिवारी की अध्यक्षता में बनाई गई पांच अफसरों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रबंध निदेशक को सौंपा, इस मामले में परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने रोडवेज के एमडी पी. गुरुप्रसाद को 24 घंटे के अंदर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, दो रीजन अलीगढ़ के आरएम अतुल त्रिपाठी एवं आगरा के क्षेत्रीय प्रबंधक पीएस मिश्रा को भी निलंबित कर दिया गया है, तीन सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों में मथुरा डिपो के एआरएम अक्षय कुमार हाथरस डिपो के गोपाल स्वरूप वर्मा व बुद्ध विहार डिपो अलीगढ़ के योगेंद्र प्रताप सिंह पर भी निलंबन की गाज गिरी है वही आधा दर्जन यातायात अधीक्षकों भी कार्रवाई की घेरे में आए हुए हैं, इनमें अलीगढ़ क्षेत्र के आयुष भटनागर, हेमंत मिश्रा, चक्कर, लक्ष्मण सिंह और आगरा रीजन के अशोक सागर एवं आरसी यादव को भी निलंबित किया गया है, इनमें तीन नियमित कर्मचारियों पर भी सख्त कार्यवाही की गई है एक बुकिंग क्लर्क मेघ सिंह, परिचालक देवेंद्र सिंह और मनोज सिंह को भी निलंबित कर दिया गया है।
बताते चलें कि एक दशक से रोडवेज अफसरों की मिलीभगत से अलीगढ़ और आगरा डिपो की 40 से 50 रोडवेज बसों पर स्थानीय माफिया अवैध तरीके से कब्जा कर उन्हें चलवा रहे थे, यात्रियों के बोलने पर उन्हें बाउंसरों से पिटवा दिया जाता था, जब इसकी सूचना मुख्यालय पहुंची तो प्रबंध निदेशक ने एक जांच टीम बनाकर इसकी गोपनीय जानकारी हासिल करने को आदेशित किया, इस मामले की जांच में जब दबंगई का मामला सामने आया तो बड़े अधिकारियों ने इस मामले को एसटीएफ को रेफर कर दिया, एसटीएफ की टीम ने बीते 2 से 3 माह में रेकी कर बीते 21 अगस्त को अपनी कार्रवाई शुरू किया तो एसटीएफ की टीम पर ही दबंगों द्वारा हमला बोल दिया गया, इसमें कई एसटीएफ कर्मियों को चोटे भी आई थी एसटीएफ ने इस मामले मे 11 लोगों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया था, एसटीएफ ने एक रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को दे दिया था वही रिकॉर्डिंग समेत अन्य तमाम बिंदुओं को खंगालने के बाद पूरी रिपोर्ट प्रशासन व शासन को सौंपने को कहा गया था।


योगी जी के काफी प्रयास सफल हुए उनमे से यह एक जिवंत उदहारण है।
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