वाराणसी (ब्यूरो) - 29 सितंबर। जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने एनर्जी एफिशिएंट क्ले ब्रिक्स ब्लॉग्स विषय पर क्लार्क होटल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में निर्माण संबंधी सामग्रियों (ईट, सीमेंट, चूना इत्यादि) की गुणवत्ता कम हुई है। अधिक मांग बढ़ने तथा कच्चा माल महंगा होने से भी बिल्डिंग मैटेरियल की गुणवत्ता में गिरावट आई है। वातावरण को प्रदूषित करने में ईट भट्टों का बड़ा योगदान है जिसे अत्याधुनिक तकनीक को अपनाकर ईट निर्माण निर्माण से प्रदूषण नियंत्रण किया जा सकता है। परंपरागत तरीकों से ईट निर्माण करने से वातावरण में एसपीएम स्तर बहुत बढ़ जाता है जिससे हम सब का उपरिवार प्रभावित होता है। जिलाधिकारी ने सभी ईट भट्ठा संचालकों को कार्यशाला के माध्यम से बताई गई आधुनिक विकसित तकनीक को अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पुरानी लाइटों को एक साथ बदलवा कर एल ई डी लाइट लगवाई गई। जिससे विद्युत ऊर्जा की बहुत अधिक मात्रा में बचत हो रही है।जिलाधिकारी ने भट्टा मालिकों के द्वारा सस्ते दामों पर शौचालय निर्माण हेतु सीटें उपलब्ध कराने पर धन्यवाद दिया। उन्होंने सभी ईंट भट्ठा मालिकों से कहा कि वे, उनके भट्ठों पर कार्यरत श्रमिकों का उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण अवश्य कराएं। बी.ओ.सी.डब्ल्यू. में पंजीकरण कराने से 16 तरह की सरकारी योजनाओं से वे श्रमिक तथा उनका परिवार आच्छादित हो सकेगा तथा उनके स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य सुविधाएं निशुल्क मिल सकेंगी। उन्होंने भट्ठा संघ के पदाधिकारियों व मालिकों से श्रमिकों को स्वास्थ्य सुविधा हेतु सरकार द्वारा विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना अंतर्गत 500000 तक का इलाज नि:शुल्क कराए जाने की सुविधा दिलाने का भी आग्रह किया।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मे मुख्य विकास अधिकारी गोरांग राठी, परियोजना अधिकारी आर.वी.सिंह सहित उत्तर प्रदेश ईट निर्माता संघ के पदाधिकारीगण/निर्माता उपस्थित रहे।
रिपोर्ट - वाराणसी ब्यूरो अब्दुल्ला वारसी

