Left Post

Type Here to Get Search Results !

Ballia Breaking: पांच दशकों से फाइलों में उलझी चकबंदी, चकबंदी के जाल में उलझें यें 10,687 खातेदार, फिर भी किसानों को इंतजार, आखिर खातेदारों की परेशानी का कब होगा अंत

सिकन्दरपुर तहसील क्षेत्र के चार गांवों में दशकों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया, मुकदमों, अभिलेखीय त्रुटियों और न्यायालयी आदेशों के चलते किसान लगा रहे हैं कार्यालयों के चक्कर, 1976 में शुरू हुई चकबंदी, 2026 में भी इंतजार

खबरें आजतक Live

मुख्य अंश (toc)

चार गांवों में दशकों से जारी है चकबंदी

सिकन्दरपुर (बलिया)। खेती के बिखरे खेतों को एक चक में समेटकर किसानों को व्यवस्थित खेती की सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई चकबंदी प्रक्रिया सिकन्दरपुर तहसील क्षेत्र के चार गांवों में किसानों के लिए लंबा इंतजार बन चुकी है। कठौड़ा में वर्ष 1976, सीसोटार और पूर में वर्ष 1982 तथा सोनुपाह में वर्ष 2006 से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। इन चारों गांवों के कुल 10,687 खातेदार अब भी चकबंदी से जुड़े मामलों के पूरी तरह निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

हजारों खातेदार प्रभावित

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कठौड़ा में वर्ष 1976 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है, जहां 751 खातेदार इससे जुड़े हैं। वहीं सीसोटार में वर्ष 1982 से प्रक्रिया जारी है और यहां 4,323 खातेदार हैं। पूर में वर्ष 1982 से चल रही प्रक्रिया से 5,459 खातेदार जुड़े हैं, जबकि सोनूपाह में वर्ष 2006 से चल रही चकबंदी के अंतर्गत 154 खातेदार हैं। चारों गांवों को मिलाकर खातेदारों की संख्या 10,687 पहुंचती है।

मुकदमों और अभिलेखों की त्रुटियों ने बढ़ाई परेशानी

चकबंदी का मूल उद्देश्य किसानों के बिखरे खेतों को व्यवस्थित कर उन्हें एक स्थान पर चक उपलब्ध कराना है, लेकिन इन गांवों में प्रक्रिया मुकदमों, अभिलेखों की त्रुटियों और न्यायालयी आदेशों के कारण लंबी खिंचती चली गई। रिपोर्ट के अनुसार पूर गांव में चकबंदी की कार्रवाई पूरी हो चुकी है और कुछ खातेदारों को कब्जा भी दिलाया गया है, लेकिन 832 खाते अभी निगरानी में हैं। कुछ मामले उप संचालक चकबंदी न्यायालय में लंबित हैं तो कुछ खातों की त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया चल रही है।

सिसोटार में चार दशक से प्रक्रिया का इंतजार

सिसोटार निवासी नीरज राय के अनुसार गांव में करीब 40 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। उनका कहना है कि प्रक्रिया धारा 52 तक पहुंचने के बाद अधिकारियों के बदलने से काम प्रभावित होता रहा है। लंबे समय से प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण किसानों को अपने मामलों के समाधान के लिए लगातार संबंधित कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।

तहसील के चक्कर लगाते-लगाते किसान परेशान

स्थानीय निवासी जीऊत वर्मा ने बताया कि चकबंदी से जुड़े मामलों को लेकर किसानों को काफी समय से तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वर्षों तक प्रक्रिया जारी रहने से किसान परेशान हो चुके हैं और चाहते हैं कि लंबित मामलों का नियमानुसार जल्द निस्तारण हो, ताकि उन्हें चकबंदी की इस लंबी प्रक्रिया से राहत मिल सके।

अधिकारी बोले, कई मामले न्यायालय में लंबित

चकबंदी अधिकारी सिकन्दरपुर राकेश कुमार सिंह के अनुसार पूर में चकबंदी की कार्रवाई पूरी हो चुकी है और कुछ खातेदारों को कब्जा भी दिलाया गया है। सीसोटार में सीमांकन की कार्रवाई पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ मामले चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी के यहां लंबित हैं। कठौड़ा में कब्जा दिया जा चुका है, लेकिन कुछ चक हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित हैं। इन न्यायालयी मामलों के कारण संबंधित प्रकरणों का अंतिम निस्तारण प्रभावित हो रहा है।

पांच दशक बाद भी अंतिम समाधान की राह

सिकन्दरपुर तहसील क्षेत्र के इन चार गांवों की चकबंदी प्रक्रिया यह सवाल खड़ा करती है कि जिन किसानों की जमीन को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से दशकों पहले प्रक्रिया शुरू हुई, उन्हें आखिर अंतिम समाधान के लिए कितना और इंतजार करना पड़ेगा। कहीं मुकदमे लंबित हैं, कहीं अभिलेखीय त्रुटियों का सुधार बाकी है तो कहीं न्यायालयी आदेशों का प्रभाव बना हुआ है। ऐसे में 10,687 खातेदारों से जुड़े मामलों के पूर्ण निस्तारण और वर्षों पुरानी चकबंदी प्रक्रिया के अंतिम पड़ाव तक पहुंचने का इंतजार अब भी लगातार जारी है।

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
image image image image image image image

Image   Image   Image   Image  

--- Top Headlines ---