"कभी भी बज सकता है पंचायत चुनाव का बिगुल, कई मायने में अहम होगा यूपी का पंचायत चुनाव"
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लखनऊ (ब्यूरो, उत्तर प्रदेश)। यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल कभी भी बज सकता है। इसको ध्यान में रखकर ही बसपा तैयारियों में जुट गई है। यूपी का पंचायत चुनाव कई मायने में अहम होगा। वजह, इसके कुछ महीनों बाद ही यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियां जो शुरू हो जाएंगी। इसीलिए बसपा पंचायत चुनाव के सहारे मिशन 2022 के लिए आधार तैयार करने का काम करने में भी जुटी हुई है। बसपा के मंडल प्रभारियों को जमीनी हकीकत परखने का निर्देश दिया गया है। मसलन पंचायत चुनाव में अगर बसपा उतरे तो उसको कितना फायदा होगा। मायावती ऐसा कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती हैं जिससे विधानसभा चुनाव से पहले गलत संदेश चला जाए। इसीलिए मंडल प्रभारियों अपने-अपने क्षेत्रों में बैठक कर यह पता लगा रहे हैं कि उनकी पार्टी चुनाव लड़े तो उसको कितना फायदा मिलेगा। मंडल प्रभारियों की रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि बसपा कितने क्षेत्रों में पंचायत चुनाव लड़ेगी।बसपा कॉडर आधारित पार्टी है। मायावती इसीलिए कॉडर की रिपोर्ट के आधार पर ही कोई फैसला करती हैं। पंचायत चुनाव शुद्ध गांव की राजनीति पर आधारित चुनाव होता है। बसपा हमेशा से गांव की पार्टी मानी जाती रही है। मायावती इसीलिए चाहती हैं कि पंचायत चुनाव में मैदान में उतरने से पहले यह परख लिया जाए कि उनकी क्या स्थिति है। चुनाव में उतरने के बाद बसपा को कितना फायदा होगा। पंचायत चुनाव का परिणाम पार्टियों का जानाधार भी तय होगा और विधानसभा चुनाव से पहले कमियां भी दूर करने का मौका मिलेगा। मायावती इसीलिए यह चाहती हैं कि सभी पहलुओं को मैदान में उतरने से पहले परख लिया जाए। इसलिए बसपा संगठन को मंडल से लेकर बूथ स्तर तक दुरुस्त किया जा रहा है। लापरवाही बरतने वाले मंडल प्रभारियों को बदला जा रहा है। मायावती ने जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर सभी वर्गों को सेक्टर प्रभारी बनाया हैं।
रिपोर्ट- लखनऊ डेस्क



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