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बलिया: शासन व डीएम के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहें यें बीएलओ व पर्यवेक्षक, दर्जनों मतदाताओं को वोटर लिस्ट से किया बाहर

"बीएलओ व पर्यवेक्षक ने 30 से 40 व्यक्तियों को मतदाता सूची में नहीं किया शामिल, ग्रामीणों में काफी आक्रोश"
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बलिया (ब्यूरो, उत्तर प्रदेश)। एक तरफ योगी सरकार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को निष्पक्ष रूप से कराने के लिए गंभीर रूख अख्तियार कर रही है। किसी भी दशा में पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए सरकार दिन रात काम कर रही है, सरकार की मंशा है की सही मतदाता अपने मतदान का प्रयोग करने से वंचित ना रहे, शासन द्वारा छूटे हुए नामों को  वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए टूटे-फूटे नामों को संशोधन करने के लिए या जो मतदाता किसी दूसरे जगह मतदान का प्रयोग करते हैं व मृतको को वोटर लिस्ट नाम हटाने के लिए बीएलओ व पर्यवेक्षक को जिम्मेदारी दिया गया हैं। जिलाधिकारी बलिया का आदेश है कि कोई भी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से छुटा हो वो अपना आईडी के साथ जुड़वा सकता बसर्ते उस गाँव का ही निवासी होना चाहिए। शासन द्वारा छूटे हुए नामों को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए टूटे-फूटे नामों को संशोधन करने के लिए या जो मतदाता किसी दूसरे जगह मतदान का प्रयोग करते हैं व मृतको को वोटर लिस्ट नाम हटाने के लिए बीएलओ व पर्यवेक्षक को जिम्मेदारी दिया गया है।

लेकिन कुछ कर्मचारी अधिकारी सरकार की मंशा के विरुद्ध कार्य करने में तनिक भी हिचक नहीं रहे हैं।लेकिन कुछ कर्मचारी अधिकारी सरकार की मंशा के विरुद्ध कार्य करने में तनिक भी हिचक नहीं रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के काजीपुर गांव मे बीएलओ व पर्यवेक्षक के द्वारा लगभग 30 से 40 ग्रामीणों का वोटर लिस्ट में नाम शामिल नही किया हैं। ग्रामीणों ने बीएलओ व पर्यवेक्षक के ऊपर संगीन आरोप लगाया है कि  जानबूझकर राजनीति दबाव में हम लोगों को वोटर लिस्ट में हमारा नाम शामिल नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच करा कर दोषियों के विरुद्ध करवाई करने के साथ ही सही पाए जाने वाले मतदाताओं का मतदाता सूची में नाम शामिल करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि बीएलओ उमाशंकर प्रसाद अध्यापक व पर्यवेक्षक राजेश यादव ग्राम विकास अधिकारी के द्वारा राजनीतिक दबाव मे हम लोगों को मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं किया गया हैं, जबकि हम सभी लोगों का नाम मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए परिवर्धन फार्म भरकर उसमें आधार कार्ड लगाकर दिया गया था। 

लेकिन बीएलओ उमाशंकर प्रसाद ने लेने से इंकार कर दिया और तहसील पर जमा करने की बात कह कर चले गए। जब की हम लोगों ने समय अंतराल के अंदर दिया था, इसके बाद पर्यवेक्षक राजेश यादव से मिलकर फार्म जमा करने को कहा तो डांट फटकार कर भगा दिया। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग 30 से 40 मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम शामिल नहीं किया गया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच कराकर सही पाए जाने वाले मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की मांग की है। ज्ञात हो कि सिंधु देवी, लाल बहादुर, रीना देवी, विवेक, रहमत, अली सहाना, बाबू अली, अली राजा, गुड़िया देवी, रहमत अली, शोएब, प्रदीप, लक्ष्मण, अखिलेश, मुन्नी देवी, कला देवी समेत लगभग 30 से 40 व्यक्तियों को मतदाता सूची में शामिल नहीं किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि सभी ग्रामीण भारत के नागरिक हैं, इनके पास सभी साक्ष्य है, आधार कार्ड है, गांव के नागरिक हैं तो इन्हें वोटर लिस्ट में शामिल क्यों नहीं किया गया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या योगी आदित्यनाथ की सरकार ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों को माफ करेगी। अगर यह सभी मतदाता सही है तो इनका निष्पक्ष जांच होना चाहिए व इस तरह का किए गए कृत्य के लिए बीएलओ व पर्यवेक्षक के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। 

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

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