सिकन्दरपुर (बलिया) क्षेत्र के खरीद दरौली घाट का ध्वस्त दक्षिणी नाका शुक्रवार की देर रात तक चले निर्माण के साथ ही सरयू नदी पर निर्मित पीपा पुल पर पुनः आवागमन शुरू हो गया है। पुल पर वाहनों को छोड़ तात्कालिक रूप से मात्र पैदल ही बिहार व यू पी में आवागमन करने की छूट दी गई है।इससे इलाकाई लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पुल के नाका के निर्माण में करीब आधा दर्जन पीपे व अन्य आवश्यक सामान लगे हैं। जिसे एक दर्जन से ज्यादा मजदूरों द्वारा लगातार तीन दिनों तक अथक परिश्रम करके बनाया गया है।
बताते चले कि पीपा पुल का दक्षिणी नाका 15 जनवरी को प्रातः नदी के कटान के चलते ध्वस्त हो गया था। जिससे तभी से पुल पर आवागमन ठप पड़ गया था। नाका के ध्वस्त होने की सूचना से लोकनिर्माण विभाग के अधिकरियों में हड़कम्प मच गया था। उसी दिन विभाग के सहायक अभियन्ता क्षितिश कुमार जायसवाल मौक़े पर पहुंच अपनी देख रेख में नाका के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू करा दिए थे।लगातार चार दिनों तक निर्माण कार्य जारी रहने के बाद मजदूर शुक्रवार को रात दस बजे नाका को बनाने में सफल हुए और शनिवार को सुबह से पुल पर आवागमन शुरू हो गया।
बताते चले कि पीपा पुल का दक्षिणी नाका 15 जनवरी को प्रातः नदी के कटान के चलते ध्वस्त हो गया था। जिससे तभी से पुल पर आवागमन ठप पड़ गया था। नाका के ध्वस्त होने की सूचना से लोकनिर्माण विभाग के अधिकरियों में हड़कम्प मच गया था। उसी दिन विभाग के सहायक अभियन्ता क्षितिश कुमार जायसवाल मौक़े पर पहुंच अपनी देख रेख में नाका के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू करा दिए थे।लगातार चार दिनों तक निर्माण कार्य जारी रहने के बाद मजदूर शुक्रवार को रात दस बजे नाका को बनाने में सफल हुए और शनिवार को सुबह से पुल पर आवागमन शुरू हो गया।
पूूर्व मे दो बार टूट चुका है ये पीपा का पुल-
पीपा का पुल इस बार चालू होने के बाद दो बार टूट चुका हैं। जिससें इलाकाई लोगों के मन में बार-बार ये सवाल उठ रहा है आखिर ऐसा क्या हो गया, जिससे पीपा का पुल दो बार टूट गया। इस संबंध मे सहायक अभियन्ता क्षितिश कुमार जायसवाल ने सफाई देते हुए कहा कि पहली बार पिकअप द्वारा मानक से अधिक भार ले जा रहा था, इसके वजह से टूट गया। वहीं दूसरी बार नदी के कटान के वजह से टूट गया। उन्होंने बताया कि नदी पर पक्का पुल बन रहा है इसके वजह से पानी का बहाव दक्षिण नाका के तरफ हो गया जिससे कटान बहुत तेज हो गया इसके वजह से पुल पर विपरीत असर पड़ा और पुल टूट गया जबकि इसको रोकने के लिये बहुत प्रयास किया गया था।

