रतसर (बलिया) स्थानीय कस्बा क्षेत्र में मैदाने कर्बला में शहीद हुए इमाम हुसैन व उनके 71 अनुयायियों की शहादत के चालीस दिन बाद उनकी याद में शनिवार को चेहल्लुम का त्योहार अमन व शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया।इसमें विभिन्न अखाड़ों द्वारा जुलूस व झांकियां निकाली गई जो मछली बाजार चौक होते हुए पकड़ीतर जामा मस्जिद पर एक हुए ।वही से जुलूस का समापन हुआ ।
ध्यातव्य हो कि इमाम हुसैन मोहर्रम की दसवीं पर शहीद हुए थे, चालीसवें पर हम सभी उनके और उनके साथियों की इस शहादत को याद करते है। हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम और मानवता के लिए यजीदियों की यातनाएं सही। करबला के मैदान में हुसैन का मुकाबला ऐसे जालिम व जाबिर शख्शियत से था, जिसकी सरहदें मुलतान और आगे तक फैली हुई थी। उसके जुल्म को रोकने के लिए इमाम हुसैन आगे बढ़े। उस समय उनके साथ मात्र 72 हकपरस्त (सैनिक) थे, तो दूसरी तरफ यजीद की 22000 हथियारों से लैस फौज थी।ईमान के लिए वे अपना सब कुछ गंवाने को तैयार थे। करबला की जंग देखने में एक छोटी सी जंग थी, लेकिन यह जंग दुनिया की सबसे बड़ी जंग साबित हुई जिसमें मुट्ठी भर लोगों ने अपनी शहादत देकर दुनिया को एक नई रोशनी दिखाई। शहीद हो कर इस्लाम का परचम लहराया था।
रिपोर्ट- संवाददाता डॉ ए० के० पाण्डेय


