आम चुनाव 2019 का बिगुल बज चुका हैं। 2014 के लोकसभा 2017 के विधानसभा में जीत के झंडे गाड़ने वाली भाजपा को चुनौती देने के लिए सुबे की दो बड़ी सियासी पार्टियां एक हो गई। सियासी पंडितों की मानें तो दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है, ऐसे में राजनीतिक दलों का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पैनी नजर हैं। बदलते मौसम के साथ हर सीट का चुनावी समीकरण बदल रहा।
एक नजर सलेमपुर के चुनावी समीकरण पर-
आजादी के बाद लगातार 1977 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। उसके बाद भारतीय लोक दल के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। उसके बाद कभी समता पार्टी कभी समाजवादी पार्टी कभी बहुजन समाज पार्टी के खाते में सीट जाती रही। 2014 के मोदी लहर में यहां पहली बार भाजपा का खाता खुला।
कौन बनेगा सलेमपुर का सुल्तान-
भाजपा ने वर्तमान सांसद रवींद्र कुशवाहा पर दांव खेला है, वहीं दूसरी ओर गठबंधन ने अब तक इस सीट पर अपना पत्ता नहीं खोला, सियासी अटकलों की मानें तो बसपा प्रदेश अध्यक्ष आर एस कुशवाहा को उम्मीदवार घोषित कर सकती है। चुंकी सलेमपुर को कुशवाहा बहुल सीट माना जाता है, और यहां की राजनीति कुशवाहा समाज के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। सीट के जातीय समीकरण पर नजर डाले तो पता चलता है सबसे ज्यादा कुशवाहा 2.60 लाख, ब्राह्मण 2.25 लाख, दलित 2.05 लाख, क्षत्रिय 2.00 लाख, वैश्य 1.85 लाख हैं। बात पिछले लोकसभा चुनाव की करें तो बीजेपी के प्रत्याशी को यहां कुल 45.88% मत मिले, वहीं दूसरी ओर सपा को 18.60% और बसपा को 18.68% मत मिले थे। पिछले चुनाव में सपा और बसपा को मिले मतों को जोड़ने पर भी भाजपा प्रत्याशी के मत ज्यादा होते हैं, लेकिन सियासी पंडितों की मानें तो इसका एक बड़ा कारण मोदी लहर था। गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने कोर वोट को स्थानांतरण करने का होगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन बनेगा सलेमपुर का सुल्तान।
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता, सत्यम राय

