बैरिया (बलिया) क्षेत्र में दर्जनों कॉलेज अंग्रेजी माध्यम से संचालित हो रहे हैं, जबकि किसी के पास मान्यता नहीं है और बच्चों के भविष्य के साथ आए दिन खिलवाड़ किया जा रहा है, अभिभावक इन की चमक दमक में फंसकर अपने बच्चों का भविष्य अंधकारमय कर रहे हैं, इन विद्यालयों मे करोड़ों रुपए हर साल आमदनी है इसलिए कोई अधिकारी यहां नहीं आते हैं क्योंकि इनकी आपसी सेटिंग बनी हुई है, दस से लेकर बीस बसों को प्रतिदिन स्कूलों में चलाया जा रहा है, बगैर मानक के अक्सर गाड़ियों में और बसों में 60 से 70 की संख्या में बच्चों को बैठाकर उनके घर ले जाया जाता है, सुबह 5:00 बजे से ही गांव की तरफ गाड़ियां आ जाती है और बच्चों को लेकर स्कूल चली जाती है और शाम लगभग 3:00 बजे से 5:00 बजे तक बच्चे घर आते हैं कुछ बच्चे नजदीक हैं वह 12:00 से 2:00 वजे तक घर पहुंच जाते हैं स्कूलों के मालिकों को पैसा कमाने में अक्सर क्षेत्र के बेरोजगार नौजवानों को दो दो हजार से लेकर 5000 तक मानदेय देकर पढ़वाया जाता है कहीं-कहीं तो पढ़ने वाले से भी पढ़ाई करवाते हैं।
रिपोर्ट- पीएमए

