सिकन्दरपुर की जनता मे इस मांग को लेकर भारी स्तर पर आक्रोश
बताते चले की इस जिले मे एक तहसील ऐसी भी है जिसे लोग फूलो की नगरी कहते है, किसी जमाने मे यह गुलाबजल, इत्र और केवड़ाजल के मुख्य उत्पादक के नाम से जाना जाता था, पर आज के परिवेश मे सच्चाई यह है कि आज यह नगर हुक्मरानों, राजनेताओं और आती जाती सरकारों के उपेक्षा के कारण यह नगर अब धीरे धीरे अपनी खुशबू को खोता जा रहा है या ये कहे की अब विलुप्त होने के कगार पर खड़ा है, जी हां हम बात कर रहे है बलिया जिले के अंतर्गत आने वाले मुख्य तहसील सिकन्दरपुर की, जिले की एकमात्र यह ही एक ऐसी तहसील है जो आजादी के इतने सालों बाद भी आजतक रेलवे लाईन से वंचित है।
ज्ञात हो कि 8, नवंबर 2008 मे उस समय के तत्कालीन रेलवे मंत्री लालू प्रसाद यादव एक वैवाहिक कार्यक्रम मे शरीक होने सिकन्दरपुर आये थे, उस दौरान आम जनता की मांग पर जयप्रकाश नगर बलिया से सिकन्दरपुर, तुर्तीपार होते हुए बेल्थरा रोड रेलवे से जोड़ने का प्रस्ताव भी पास कर दिया था, इस पूरे प्रस्तावित रेलवे खण्ड पर उस समय तत्काल सर्वे भी हुआ और झंडे भी गाड़ दिये गये, इस विस्तारित रेलवे खण्ड के लिये सरकार द्वारा 4 अरब 88 करोड़ रूपए भी प्रस्तावित हुआ था पर उसके थोड़े समय बाद ही आमचुनाव होने के कारण ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते मे चला गया, आज 10 वर्ष बाद भी किसी भी हुक्मरानों, राजनेताओं और आती जाती सरकारो के लोगों ने इस प्रोजेक्ट को आजतक ठंडे बस्ते से निकालने के लिये कोई भी पुरजोर कोशिष नही की।
यह हमारे देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि महर्षि भृगु की धरती बलिया जो जयप्रकाश नरायण, हजारी प्रसाद द्विवेदी, छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र, चित्तू पांडे, मंगल पांडे जैसे लोगो की जन्मस्थली व कर्मस्थली कहे जाने वाले यह बलिया की धरती आज भी देश व प्रदेश मे आती जाती सरकारों द्वारा उपेक्षित है, इस धरती के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यो हो रहा है और कब तक होता रहेगा, इसका जवाब पाना शायद मुश्किल ही नही नामुमकिन है।
72 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी व क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार शंम्भू नाथ मिश्र बताते है कि सिकन्दरपुर तहसील इतने दिनो से उपेक्षित है पर कोई भी राजनेता और समाजसेवी इस बारे मे आजतक कोई भी काम नही करता, हर नेता और समाजसेवी सिर्फ विकास करने का ढ़िढोरा पीटते रहते है पर वास्तविकता की जमीन पर अभी तक कुछ नही हुआ है न लगता है कि आगे भी कुछ होगा।

