गिरफ्तार कारखास चालक चिल्ला चिल्ला कर कहता रहा की जब मैं दोषी तो बड़े साहब दोषी क्यों नही लेकिन नही सुनी उसकी गयी बात
वाराणसी (ब्यूरो) बीते 24 सितम्बर को तस्कर व वाराणसी जनपद के मिर्जामुराद थाने के सिपाही (चालक) के बीच कछवां रोड में पकड़ी गई दो पशु लदे ट्रको को छोड़ने के लिए दो दिनों तक मोबाईल पर रूपये के लेन देन के बातचीत का ऑडियो वायरल होते ही वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक आनन्द कुलकर्णी ने तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रहे विश्वजीत प्रताप सिंह व उनके कारखास सिपाही अशफाक हैदर अली को लाईन हाजिर करते हुए मामले की जॉच सीओ कैण्ट (आईपीएस)अनिल कुमार सिंह को सौपी है।जिसके बाद चालक को निलम्बित भी कर दिया गया।सूत्रो की माने तो गुरुवार को मुख्यमंत्री शहर में थे और सारा मामला जिले के एक प्रभाव शाली मंत्री ने उनके कानो तक पहुँचाया तो आनन फानन में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर करखास थाने के चालक अशफाक हैदर अली निवासी ग्राम सड़वा खुर्द (घूरपुर) इलाहबाद के खिलाफ कार्य वाहक थाना प्रभारी एसआई रामप्रकाश यादव की तहरीर पर गुरुवार की देर रात मिर्जामुराद थाने में धारा 8/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर शुक्रवार की सुबह खजुरी के पास से सिपाही (चालक) को गिरफ्तार कर हवालात में डाल दिया गया, उधर हवालात में बन्द सिपाही थाने पर पहुँचने वाले हर लोगो से बस यही कहता रहा की अगर हम दोषी है तो बड़े साहब दोषी क्यों नही बिना थाना प्रभारी के आदेश पर कौन सा कार्य थाने पर होता है, लगभग तीन वर्षो से इसी थाने पर ड्यूटी कर रहे सिपाही को उसी थाने की हवालात में डाले जाने की खबर पुरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।बताते चले की मिर्जामुराद के खजुरी पुलिस चौकी के अंतर्गत हाईवे किनारे भी एक बस्ती में लम्बे समय से पशु तस्करी का धंधा चल रहा था।जिससे पुलिस को अच्छी खासी मोटी रकम मिलती थी जो चौकी से लेकर थाने तक जाती थी।सूत्रो की माने तो अभी और पुलिस कर्मियो के ऊपर गाज गिरना तय है, गिरफ्तार सिपाही को लिखा पढ़ी के बाद जेल भेज दिया गया।
रिपोर्ट - वाराणसी ब्यूरो अब्दुल्ला वारसी

