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BIG BREAKING: बलिया भाजपा में बड़ा बवाल! जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के गंभीर आरोप, FIR में नाम नहीं, जांच के बीच उठे कई बड़े सवाल

कथित महिला भाजपा पदाधिकारी का वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप, जिलाध्यक्ष ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित और मनगढ़ंत, पुलिस ने तीन अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा

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राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

बलिया (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश के बलिया में भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक कथित भाजपा महिला पदाधिकारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। कथित तौर पर भाजपा जिला कार्यसमिति से जुड़ी एक महिला ने वायरल वीडियो में भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा समेत चार लोगों पर दुष्कर्म, शारीरिक एवं मानसिक शोषण और निजी वीडियो के जरिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उपलब्ध पुलिस जानकारी के मुताबिक दर्ज मुकदमे में संजय मिश्रा का नाम शामिल नहीं है।

वायरल वीडियो से गरमाया मामला

महिला द्वारा लगाए गए आरोपों वाला वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। महिला का आरोप है कि उसका कथित निजी वीडियो बनाया गया और उसे वायरल करने की धमकी देकर उसका शोषण किया गया। विरोध करने पर वीडियो वायरल किए जाने का भी दावा किया गया है। मीडिया रिपोर्टों ने भी स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो और उसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जिलाध्यक्ष पर महिला ने क्या लगाए आरोप?

वायरल वीडियो में महिला ने भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, जिला मंत्री आलोक सिंह मोनू, गणेश गुप्ता और अजीत मिश्रा चंदन के नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि निजी वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म, शारीरिक एवं मानसिक शोषण किया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई में कठिनाई हुई और बाद में दर्ज मुकदमे से जिलाध्यक्ष का नाम हटाया गया। यह आरोप महिला का दावा है, उपलब्ध पुलिस बयान इसकी पुष्टि नहीं करता।

FIR में संजय मिश्रा का नाम नहीं

इस पूरे मामले का सबसे अहम तथ्य यही है कि उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार बांसडीह कोतवाली में दर्ज मुकदमे में भाजपा जिला मंत्री आलोक सिंह, गणेश गुप्ता और अजीत मिश्रा के नाम हैं। 16 सितंबर की रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से बताया गया कि महिला की तहरीर पर इन तीन लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोप निजी वीडियो को बिना अनुमति प्रसारित करने से संबंधित हैं।

पुलिस ने तीनों के मोबाइल किए जब्त

मामले की जांच में पुलिस ने तीन आरोपितों के मोबाइल फोन जब्त कर तकनीकी जांच के लिए भेजे हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार साइबर सेल की मदद से कथित रूप से डिलीट किए गए वीडियो को रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस वीडियो के स्रोत, प्रसारण और डिजिटल साक्ष्यों की कड़ियों की जांच विस्तार से कर रही है।

संजय मिश्रा ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत

उधर महिला द्वारा लगाए गए आरोपों पर भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने आरोपों को राजनीति से प्रेरित और मनगढ़ंत बताया तथा कहा कि इस प्रकरण से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इस तरह फिलहाल मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। एक ओर महिला के गंभीर आरोप लगाएं हैं, जबकि दूसरी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष ने उनका खंडन कर रहे हैं।

असली सवाल अब पुलिस जांच पर

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों और दर्ज FIR में इतना अंतर क्यों है? क्या महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में अलग से कोई शिकायत, शपथपत्र या न्यायिक प्रक्रिया चल रही है? क्या जांच के दौरान संजय मिश्रा की भूमिका को लेकर कोई साक्ष्य सामने आता है? इन सवालों का जवाब अभी जांच और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।

भाजपा संगठन के सामने भी उठे सवाल

मामले ने भाजपा संगठन के सामने भी कई सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी पार्टी की महिला पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से अपने ही संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर इतने गंभीर आरोप लगाती है, तो संगठन को मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने रखनी होगी। दूसरी तरफ, केवल आरोप लग जाने से किसी व्यक्ति को दोषी मानना भी उचित नहीं है। इसलिए संगठनात्मक स्तर पर किसी निष्कर्ष से पहले पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के तथ्यों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

सोशल मीडिया पर मामला बना चर्चा का केंद्र

महिला का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस प्रकरण को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ पोस्टों में आरोपों को लेकर तीखी टिप्पणियां की जा रही हैं, जबकि दूसरी ओर संजय मिश्रा के समर्थक आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज तथ्यों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी है।

अब जांच बताएगी आरोपों की सच्चाई

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि एक महिला भाजपा पदाधिकारी ने भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं; संजय मिश्रा ने उन आरोपों से इनकार किया है; वहीं पुलिस ने निजी वीडियो के कथित प्रसारण के मामले में तीन अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच, डिजिटल साक्ष्यों और आगे की कानूनी कार्रवाई पर हैं। आरोपों की वास्तविकता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

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