गांधी के सत्य, अहिंसा और सद्भाव के विचार आज भी विश्व के लिए प्रासंगिक, सिकन्दरपुर के जूनियर हाईस्कूल में विचार गोष्ठी, वक्ताओं ने गांधी दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर रखे विचार, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता पर दिया जोर
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आज भी चर्चा और चिंतन का विषय
सिकन्दरपुर (बलिया)। महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर स्थानीय जूनियर हाईस्कूल के प्रांगण में शुक्रवार को एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन, उनके सत्य, अहिंसा, सद्भाव, स्वदेशी, सेवा और आत्मनिर्भरता से जुड़े विचारों पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि गांधी जी के विचार किसी एक कालखंड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव समाज के सामने मौजूद अनेक चुनौतियों के संदर्भ में आज भी चर्चा और चिंतन का विषय बने हुए हैं।
सत्य को गांधी जी ने बनाया जीवन का आधार
गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने गांधी जी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने सत्य को अपने जीवन का मूल आधार बनाया और अन्याय के विरोध में सत्याग्रह को एक प्रभावी अहिंसक माध्यम के रूप में अपनाया। उन्होंने कहा कि गांधी जी के लिए अहिंसा का अर्थ केवल शारीरिक हिंसा से बचना नहीं था, बल्कि किसी भी ऐसे आचरण से बचना था जिससे दूसरे व्यक्ति को कष्ट पहुंचे। गांधी जी ने सत्य, अहिंसा और सद्भाव को सामाजिक जीवन से जोड़ते हुए लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अन्याय का विरोध करने की प्रेरणा दी।
सत्य ही ईश्वर है की अवधारणा पर हुई चर्चा
वक्ताओं ने गांधी जी की उस विचारधारा का भी उल्लेख किया जिसमें सत्य को सर्वोच्च स्थान दिया गया। गोष्ठी में कहा गया कि गांधी जी ने सत्य को केवल भाषण या सिद्धांत का विषय नहीं माना, बल्कि उसे अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में व्यवहार का आधार बनाने का प्रयास किया। वक्ताओं के अनुसार गांधी जी का सत्याग्रह इसी विचार से जुड़ा था। अन्याय का विरोध हो, लेकिन विरोध का रास्ता हिंसा नहीं बल्कि सत्य और अहिंसा हो।
गांधी दर्शन में सद्भाव और मानवता का महत्व
राज्यसभा सदस्य नीरज शेखर ने कहा कि गांधी जी के जीवन में सत्य, अहिंसा, त्याग और सेवा जैसे मूल्यों का विशेष स्थान रहा। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने धार्मिक एवं नैतिक शिक्षाओं को केवल पुस्तकीय चर्चा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपने आचरण में उतारने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव और परस्पर सम्मान किसी भी स्वस्थ समाज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। गांधी जी के विचारों में मानवता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की भावना दिखाई देती है।
स्वदेशी से आत्मनिर्भरता का संदेश
पूर्व मंत्री नारद राय ने गांधी जी के स्वदेशी आंदोलन और चरखे के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वदेशी गांधी जी के विचारों में केवल वस्तुओं के उपयोग का विषय नहीं था, बल्कि यह स्थानीय श्रम, उत्पादन और आत्मनिर्भरता से भी जुड़ा था। उन्होंने कहा कि चरखे को गांधी जी ने जनभागीदारी और आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया। स्वदेशी के माध्यम से उन्होंने देशवासियों को स्थानीय संसाधनों और श्रम के सम्मान का संदेश दिया।
युवाओं को गांधी विचारों से जुड़ने की जरूरत
कार्यक्रम में आगंतुकों का स्वागत करते हुए पूर्व मंत्री राजधारी सिंह ने युवा पीढ़ी से गांधी जी के विचारों को समझने और उन्हें अपने जीवन में अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि गांधी जी के विचार आज भी समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं और सत्य, अहिंसा तथा सद्भाव जैसे मूल्यों के माध्यम से सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव की दिशा में काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती केवल एक स्मरण दिवस न होकर आत्ममंथन का अवसर भी है। नई पीढ़ी को महापुरुषों के जीवन और संघर्ष को समझकर उनके सकारात्मक मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे अपने विचार
विचार गोष्ठी को भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, पूर्व विधायक भगवान पाठक, मांधाता सिंह, प्रयाग चौहान, सुरेश सिंह, केशव चौधरी, सुनील वर्मा, जयराम पाण्डेय, रणजीत राय, मैनजर चौहान, हेमंत सिंह, बैजनाथ पाण्डेय, ओम प्रकाश पाठक, नसीम, डॉ मोहनकांत राय, सनने राय, विनोद शंकर गुप्त, अशोक सिंह, युवराज सिंह, आनंद चौहान सिंह, सर्वेश राय, मनोज सिंह, कमलेश्वर सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने गांधी जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए सत्य, अहिंसा, सामाजिक सद्भाव, स्वदेशी और सेवा की भावना को वर्तमान समय में भी महत्वपूर्ण बताया।
अध्यक्षता व संचालन ने कार्यक्रम को दिया स्वरूप
कार्यक्रम की अध्यक्षता हेमंत सिंह ने की, जबकि संचालन भोला सिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गांधी जी के जीवन और विचारों पर अपने-अपने विचार साझा किए। विचार गोष्ठी में बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों के साथ स्थानीय नागरिकों की भी मौजूदगी रही।
विचारों से निकला सामाजिक सरोकार का संदेश
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित इस विचार गोष्ठी का मूल संदेश यही रहा कि गांधी जी को केवल इतिहास के एक महान व्यक्तित्व के रूप में याद करने के बजाय उनके विचारों पर निरंतर संवाद और चिंतन किया जाना चाहिए। सत्य, अहिंसा, सद्भाव, सेवा और स्वदेशी जैसे विषय आज भी सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण चर्चा का आधार बन सकते हैं। सिकन्दरपुर के जूनियर हाईस्कूल में आयोजित यह गोष्ठी गांधी जी के विचारों को याद करने के साथ-साथ उन्हें वर्तमान सामाजिक संदर्भों में समझने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक अवसर बनी।
रिपोर्ट- विनोद कुमार गुप्ता

