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यूपी: 21वीं सदी में शोध का आयाम गुणवत्तापरक एवं जनोपयोगी हो गया है- डा० गणेश पाठक


मऊ (ब्यूरों) अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं सेवानिवृत्त प्राध्यापक, पर्यावरणविद् डा० गणेश कुमार पाठक ने डी० सी० एस० के० स्नातकोत्तर महाविद्यालय मऊ में भूगोल विभाग द्वारा आयोजित "भूगोल में शोध का महत्व एवं शोध प्रविधियाँ" नामक एक दिवसीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आज भूगोल विषय का आयाम विस्तृत हो गया है ।यद्यपि कि भूगोल पहले से ही एक अन्तरानुशासिक विषय रहा है, जिससे इस विषय का विशेष व्यावहारिक पक्ष रहा है, किन्तु 20 वीं सदी से ही इस विषय में वैज्ञानिक एवं जन कल्याणकारी व्यवहारिक पक्षों का समावेश होने लगा और 21 वीं सदी के इतने दिनों में तो भूगोल वैज्ञानिकता से ओत- प्रोत होकर विशेष रूप से जन कल्याणकारी आयामों को प्रदान करते हुए विशेष रूप से उपयोगी हो गया है। भूगोल के अध्ययन में जी०  आई० एस० एवं रिमोट सेंसिंग का अध्ययन जुड़ जाने तथा कम्प्यूटर का प्रयोग बढ जाने से इसका व्यवहारिक पक्ष विशेष रूप से सबल हुआ है ।
डा० पाठक ने बताया कि आज भूगोल विषय में शोध के आयाम में भी परिवर्तन आया है और शोध परम्परागत पथ से अलग होकर वैज्ञानिकता की कसौटी पर  खरा उतरने वाला हो गया है । आज शोध व्यवहारिकता से युक्त जन कल्याणकारी होता जा रहा है और यही शोध का वास्तविक स्वरूप भी होना चाहिए ।डा० पाठक ने अपने उद्बोधन में शोध प्रविधियों से जुड़े विभिन्न पक्षों पर विस्तृत चर्चा की जो शोधार्थियों के लिए विशेष उपयोगी रहा ।डा० पाठक ने यह भी बताया कि अब शोध में नकल की गुँजाइश नहीं रह गयी है, क्योंकि शोध में नकल की पहचान करने वाला ऐप विकसित हो गया है, जिसके आधार पर शोध प्रबन्ध निरस्त हो सकता है एवं जेल भी जानी पड़ सकती है। इसमें शोध पर्वेक्षक के लिए भी सजा का प्राविधान बनाया गया है।
बतौर विशिष्ट अतिथि गोष्ठी को संबोधित करते हुए सर्वोदय पी० जी० कालेज घोषी के प्राचार्य भूगोलविद् डा० करूणानिधान उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शोध के स्वरूप को बदलना होगा । शोध का स्वरूप जनोपयोगी हो, इसके लिए देश, काल एवं परिस्थिति के अनुसार शोध के विषय का चयन करना होगा और शोध की उपयोगिता को सिद्ध करनी होगी ।
गोष्ठी का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। गोष्ठी प्रारम्भ होने से पूर्व मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को महाविद्यालय के  प्राचार्य द्वारा एवं भूगोल विभाग के शिक्षकों द्वारा अंगवस्त्रम् से शुशोभित कर सम्मानित किया गया । गोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डा० अरविन्द कुमार मिश्र ने किया, जबकि संचालन डा० सुधीर कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर भूगोल विभाग सहित अन्य विभागों के शिक्षक, शोध छात्र व छात्राएँ एवं भूगोल का अध्ययन करने वाले छात्र- छात्राएँ उपस्थित रहे ।
रिपोर्ट- संवाददाता डॉ ए० के० पाण्डेय

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