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सरदार पटेल में कौटिल्य की कूटनीतिज्ञता तथा महाराज शिवाजी की दूरदर्शिता थी- परमात्मानन्द पाण्डेय


रतसर (बलिया)  शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी शिक्षण संस्थान रतसर इंटर कॉलेज ,रतसर,बलिया जो 1948 से संचालित है, में बुधवार की सुबह आधुनिक भारत के रचनाकार लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनायी गई ।विद्यालय में इस अवसर पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सभी छात्र-छात्राओं तथा अध्यापकों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
इस दौरान प्राचार्य श्री परमात्मानंद पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नाडियाद गुजरात मे हुआ था ।बारडोली सत्याग्रह की सफलता पर इन्हें सरदार की उपाधि मिली।आजादी के पश्चात विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण मे केन्द्रीय भूमिका निभाने के कारण इन्हें भारत का बिस्मार्क तथा लौह पुरुष भी कहा जाता है ।वे हमारे स्वतंत्र भारत के पहले उपप्रधानमंत्री तथा पहले गृहमंत्री थे ।विश्व इतिहास में कोई भी ऐसा व्यक्ति नही हुआ जिसने इतनी बड़ी संख्या में राज्यो का एकीकरण करने का साहस किया हो ।
सरदार पटेल में कौटिल्य की कूटनीतिज्ञता तथा महाराज शिवजी की दूरदर्शिता थी।अखण्ड भारत के निर्माण में पटेल जी के योगदान को भुलाया नही जा सकता ।प्राचार्य महोदय ने उपस्थित सभी लोगो को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलवायी ।इस गोष्ठी में मुख्य रूप से श्रीमती भगवती पाण्डेय, डॉ आत्मानंद सिंह,रामप्रताप सिंह,कमलाकांत सिंह,शंभू नारायण सिंह,बृजेश कुमार सिंह,जावेद मुख्तार,शाहिद मुनीर,राजेश खरवार,विजय प्रकाश,राजीव पाण्डेय,आदित्य सिंह आदि लोग मौजूद रहे ।गोष्ठी की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य श्री परमात्मानंद पाण्डेय तथा संचालन डॉ आत्मानंद सिंह ने किया ।
           
रिपोर्ट- संवाददाता डॉ अभिषेक पाण्डेय

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