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ग्लोबल खतरा बनता जा रहा है जीका वायरस नामक बीमारी- डॉ पंकज मिश्रा


सिकन्दरपुर (बलिया) स्थानीय क्षेत्र के होमियोपैथिक डॉ पंकज मिश्र ने जीका वायरस बीमारी के बारे मे "खबरें आजतक Live" से विस्तारपूर्वक बात करतें हुए इस बीमारी के लक्षण व इलाज से संबंधित तमाम विंदुओं पर प्रकाश डाला, आइये हमसभी उन्हीं के कलम से इस खतरनाक बीमारी के तमाम पहलुओं के बारें मे जानने की कोशिश करते हैं।

दोस्तों जीका वायरस नामक बीमारी सिर्फ भारत ही नही बल्कि कई देशो को अपनी चपेट में ले चुका है ये वायरस पूरें विश्व पर एक ग्लोबल खतरा बनता जा रहा है, इस खतरे का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अकेले यह वायरस ब्राजील में 15 लाख लोगों को प्रभावित कर चुका है और यह अब आये दिन भारत मे भी बहुत लोगो को अपनी चपेट में ले चुका है अभी तक इस बीमारी की कोई भी दवा नही बनी है, इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी चिंता जाहिर कर चुका है, CDC सेंट्रल फ़ॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार जीका वायरस बीमारी का इलाज करने के लिए पीड़ित को ज्यादा से ज्यादा आराम करनें और निर्जिलिकरण से बचने के लिए ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
                                           
क्या है ये जीका वायरस-
जीका वायरस flaviridae नामक वायरस परिवार का सदस्य है, जीका वायरस की पहचान सबसे पहले यूगांडा में 1947 में हुई थी और यह वायरस सबसें पहले बंदरो में पाया गया, यह वायरस संक्रमित एडीज नामक मच्छर की प्रजाति के काटने से फैलता है इसी तरह के मच्छर डेंगू बुखार, चिकनगुनिया भी फैलाते है, इसका दूसरा नाम ज़ीका फारेस्ट भी है ये ज़ीका वायरस जीका फारेस्ट का नामकरण तब हुआ जब इससें संबंधित सबसे पहला मामला 1952 में जीका से प्रभावित मानव का सबसे पहला मामला सबकें सामने आया और तब से यह लगातार फैल रहा है, इस बीमारी ने अभी तक अफ्रीका, अमेरिका, दक्षिण एशिया, आइसलैंड समेत अब तक लगभग 25 देशो को अपने चपेट में ले चुका है।

जीका वायरस के लक्षण:-
इसका लक्षण समान्य होता है जैसे बुखार (Fever) आना, चमड़े पर लाल चकत्ते (Skin Rases) होना, मांशपेशियां और जोड़ो में दर्द (Musles and Joint Pain) होना, आँखे लाल (Conijictivitis) होना और शरीर मे बेचैनी उत्पन होना, ये सारे लक्षण वायरस से पीड़ित व्यक्ति मे 2 से 7 दिनो तक रहते है।
  
खतरा:-
सबसे ज्यादा खतरा गर्भावस्था में पल रहा बच्चा माँ के पेट मे होता है वह जीका से प्रभावित हो जाता है और उसका सर आकर में छोटा और अविकसित दिमाग (Micro Cephelus) के चपेट में आ जाता है, दुसरा खतरा भी जबरजस्त हो सकता है जो तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पे होता है और इससे लोगो को लकवा भी हो जाता है, जीका वायरस लैब टेस्ट में स्पेसिमेन (Urine) पेशाब, (Semen)सीमेन, (Sliva) लार से प्रमाणित किया जाता है।

कैसे बचें हम जीका वायरस से:- 
यदि आप जीका से प्रभावीत जाने की योजना बना रहे है,तो आप मच्छरों के काटने से बचाव रखिये इसके लिए रिप्लेंट क्रीम का प्रयोग करे, दूसरी बात पूरे आस्तीन का पेंट और कमीज पहनिये, घर के आस पास खिड़की दरवाजे ,बाल्टी ,गमला में पानी डैम न होने दे, ये सेक्स से भी फैलता है जो ब्यक्ति जीका संक्रमण से प्रभावित है उसको अपने पार्टनर से सेक्स करने में परहेज करें नही तो आप का पार्टनर भी जीका से संक्रमित हो सकता है।  

इलाज:-                  
ट्रीटमेन्ट के आधार पर देखा जाए तो जहां एलोपैथी में इस बीमारी के लिए कोई भी मेडीसिन नही बना है वही होमियोपैथी चिकित्सा में लक्षण के आधार पर दवा है जैसे Belladonna -200, Eupatorium Perf-200, Rhus Tox 200 आदि दवाएं है लेकिन ध्यान दे ये सभी दवाएं अपने नजदीक किसी होमियोपैथी डॉ० के उचित परामर्श से ही ले और ज्यादा परेशानी हो तो किसी हॉस्पिटल में तुरन्त चेकअप करवाये।

डॉ पंकज मिश्र की कलम से-

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