सिकन्दरपुर (बलिया) तहसील क्षेत्र के सिवानकलाँ,सिकन्दरपुर स्थित शिक्षा के क्षेत्र मे अग्रणी शिक्षण संस्थान एल एन नेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संस्थापक, प्रखर वक्ता, जुझारू सामाजिक कार्यकर्ता व बहुत ही सौम्य व्यक्तित्व के मालिक नियाज अहमद ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरूआत कर दिया है, आगामी लोकसभा चुनाव 2019 मे वह एक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप मे सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनावी बिगुल फूकेंगे।
"खबरें आजतक Live" के साथ हुई विशेष बातचीत के दौरान नियाज अहमद ने कहा कि तमाम सरकारे आयी और गयी विकास के लिये बड़े बड़े वादे किये गये, विकास का ढिंढोरा पीटा गया लेकिन जमीनी स्तर पर कितना विकास हुआ है यह क्षेत्र की जनता बखूबी जानती है, इस देश के नेताओं ने राजनीति और सत्ता को अपना पेशा बना रखा है जिससे उनका तो खुब विकास हो रहा है पर एक आम आदमी आज भी सिर्फ़ दो वक्त की रोटी का प्रबंध करने मे पुरा दिन गुजार देता है।
आगे कहा कि चुनावी दौरों मे ये नेता हाथ जोड़कर वोट के लिये पैरों मे गिर जाते है, अपनापन दिखाने के लिये दलितों के घरो मे खाना भी खाते है, पर जैसे ही ये चुनाव जीत जाते है अचानक गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेते है और जिसके घर खाना खाया उसको पहचानते तक नही, यही इस देश का दुर्भाग्य है कि इनका विकास कभी गरीबों की झोपड़ियों तक नही पहुंच पाता, गरीब के पेट तक नही पहुच पाता।
आगे कहा कि मेरा राजनीति मे आने का सिर्फ एक ही मकसद है और वो है समाज की सेवा और विकास का नया आयाम स्थापित करना, उन्होंने कहा कि मै इस देश के पेशेवर नेताओं को दिखाना चाहता हूँ कि वाकई मे विकास के क्या मायने होते हैं और जमीनी स्तर पर विकास होता कैसे है।
बताते चले की इस समय नियाज अहमद अपना जनसंपर्क अभियान बहुत ही तेज गति के साथ चला रहे है, इस अभियान के तहत अभी तक वो सैकड़ों गावों का सफर तय कर चुके है, अपने जनसंपर्क के दौरान नियाज अहमद लगातार अपने एजेंडा से आम जनमानस को रूबरू कराते हुए उनकी समस्याओं को भी सुन रहे है,उनका कहना है कि मैने आम जनमानस और जमीनी स्तर पर विकास के लिये ही राजनीति मे कदम रखा है।
आम जनता द्वारा मिल रहे भरपूर प्यार और समर्थन से उत्साहित नियाज अहमद ने कहा कि जनता सच मायनें मे विकास चाहती है और झूठे वादे करने वाले सरकार और नेताओं से ऊब चुकी है, आत्मविश्वास से लबरेज़ नियाज अहमद ने कहा कि "न जाति से न धर्म से,नियाज आयेंगे अपने कर्म से"
विनोद कुमार गुप्ता की विशेष रिपोर्ट





