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यूपी: जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक का निर्देश भी साबित हो रहा हवा हवाई


सिकन्दरपुर (बलिया) कानून व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने व अपराधी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए भले ही क्षेत्र में समय-समय पर वाहन चेकिंग अभियान चलाया जाता हो लेकिन पुलिस अपने कर्तव्यों का पालन करने के बजाय अपना उल्लू सीधा करने में व्यस्त रहती है। इस समय पूरे क्षेत्र में बिना नंबर के बड़े व छोटे वाहन तो फराटे भर ही रहे हैं। साथ ही अस्पष्ट नंबर पड़े छोटे वाहन अपराधी घटनाओं में खूब सहयोग कर रहे हैं। इस समय अधिकांश वाहनों में पुलिस, प्रेस, वकील और सत्ताधारी पार्टी का पद लिखा हुआ पाया जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि इनमें अधिकांश गाड़ियां ऐसे लोगों की हैं जिनका प्रेस, मीडिया, पुलिस व किसी पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। अक्सर यह भी देखने में आ रहा है कि अगर कोई दूधिया वाला पुलिस वाले के यहां दूध देता है तो उसने अपनी गाड़ी में पुलिस लिखवा लिया, अगर कोई किसी पत्रकार की गाड़ी खरीद ली तो वह खुद पत्रकार बन गया। अगर किसी का रिश्तेदार पत्रकार है तो उसने भी अपनी गाड़ी में प्रेस लिखा रखा है। तमाम चोरी के वाहन पर प्रेस, पुलिस व एडवोकेट व सत्ताधारी पार्टी का पद लिखा हुआ रहता है, ताकि पुलिस उनको रोके ना इसके साथ ही किसी वाहन में पीछे नंबर है तो आगे है ही नहीं। इसके अलावा भारी संख्या में इस समय अस्पष्ट नंबर वाले वाहन बिना किसी के भय से चल रहे हैं। दुर्घटना अथवा आपराधिक वारदात करने के बाद यह लोग बड़ी आसानी से भाग जाते हैं। दुर्घटना व अपराधिक घटना के बाद स्थानीय लोग सही नंबर अंकित नहीं कर पाते जो पुलिस को सूचना दे सके। विश्वस्त सूत्रों की माने तो अपराध में लिप्त लोग तो अलग-अलग नंबरों की प्लेट साथ में रखते हैं। हालांकि हर समय जिला अधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी वाहन स्वामियों को वाहन के आगे पीछे स्पष्ट नंबर लिखवाने के निर्देश भी जारी किए जाते है। लेकिन अधिकारियों के निर्देश भी हवा हवाई साबित हो रही है।

रिपोर्ट- रमेश जायसवाल

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