वाराणसी (व्यूरो) - 22 सितंबर। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय जन औषधि योजना को देश की चिकित्सा व्यवस्था के लिए मजबूत आधार मानते है। चिकित्सा जगत में इस योजना के आने से आम जनमानस को व्यापक लाभ दिखने की उम्मीद भी जग चुकी थी। क्योंकि इससे एक ओर जहां फार्मा दवाइयों की अपेक्षा जेनेरिक दवाइयां 60 से 70 प्रतिशत कम बाजार मूल्य पर आसानी से उपलब्ध हो जाती वहीं दूसरी ओर चिकित्सा जगत में रोजगार का एक नया दरवाजा भी खुल जाता। लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी के उपनगर रामनगर के लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय के डॉक्टर कमीशन के लालच में धड़ल्ले से बाहर से दवाइयां व सभी प्रकार के जांच लिख रहे हैं। भ्रष्टाचार में पूरी तरह से लिप्त अस्पताल प्रशासन को न तो शासन के चाबुक का कोई डर है और न ही जिला प्रशासन का खौफ। लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय परिसर में अभी बीते महीने ही सत्ताधारी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष व एमएलसी लक्ष्मण आचार्य ने जिस भारतीय जन औषधि केंद्र का उद्घाटन करते हुए सत्ताधारी पार्टी की उपलब्धियों का बखान करते हुए उपस्थित जनता की वाहवाही खूब बटोरी थी अब उस केंद्र पर दवाइयां उपलब्ध नहीं रहती हैं। मरीज व उनके तीमारदारो को दवाइयों अथवा सभी प्रकार के जांच के लिए निजी व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ता है। मजे की बात यह है कि इस बात की शिकायत जब मरीजों अथवा उनके तीमारदारो द्वारा अस्पताल के सीएमएस डॉ. कमल किशोर से की जाती है तो वह सारा ठीकरा शासन पर फोड़ते हुए आग बबूला हो उठते हैं। सिगमा प्रतिनिधि से बात करते हुए नगर के प्रमुख समाजसेवी कृपा शंकर यादव ने बताया कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को समर्पित उपरोक्त अस्पताल में आज भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। जिस दिन नगर की जनता का धैर्य टूटेगा उस दिन किसी बड़ी हो अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कृपा शंकर ने यह भी बताया कि रामनगर का आम जनमानस लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय के डॉक्टरों की कार्यशैली को नोटिस भी करना प्रारंभ कर चुका है। कृपा शंकर यादव ने लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आम जनमानस को एकजुटता के साथ खड़े होने का आवाहन भी किया। बताते चलें कि अस्पताल प्रशासन के भ्रष्टाचार के खिलाफ रामनगर का आम जनमानस कई बार सड़कों पर भी उतर चुका है। फिर भी शासन की चुप्पी और प्रशासन के द्वारा समस्याओं के नजरअंदाज किए जाने से रामनगर का आम जनमानस इसे लाल बहादुर शास्त्री जी के सम्मान के साथ डॉक्टरों द्वारा जानबूझकर खिलवाड़ किया जाना बता रहे है।
रिपोर्ट - वाराणसी ब्यूरो अब्दुल्ला वारसी

